देशभर में E-20 पेट्रोल लागू होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका असर आम वाहन चालकों की जेब पर कितना पड़ेगा। भारत जैसे माइलेज-सेंसिटिव बाजार में हर लीटर ईंधन की अहमियत होती है। ऐसे में लोगों के मन में यह जानने की उत्सुकता है कि E-20 पेट्रोल से माइलेज कितना कम होगा, ईंधन की खपत कितनी बढ़ेगी और क्या मेंटेनेंस पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। विभिन्न ऑटो विशेषज्ञों की राय के आधार पर आइए पूरे मामले को समझते हैं।
माइलेज घटने से कितना बढ़ सकता है खर्च?
यदि किसी कार का माइलेज पहले 15 किलोमीटर प्रति लीटर था और E-20 पेट्रोल के बाद यह घटकर लगभग 14.2 किलोमीटर प्रति लीटर रह जाता है, तो रोजाना 50 किलोमीटर चलने वाले वाहन मालिक को महीने में लगभग 3 लीटर अतिरिक्त ईंधन की जरूरत पड़ सकती है। मौजूदा कीमतों के हिसाब से इससे मासिक खर्च करीब 300 रुपये तक बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अतिरिक्त खर्च बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन सीमित बजट वाले परिवारों पर इसका असर महसूस हो सकता है।
पुरानी गाड़ियों पर ज्यादा असर संभव
ऑटो विशेषज्ञों का कहना है कि E-20 पेट्रोल का असर नई और पुरानी गाड़ियों पर समान नहीं होगा। नई E-20 अनुकूल (Compatible) गाड़ियों में नुकसान की संभावना कम है, जबकि पुरानी गाड़ियों में माइलेज गिरने के साथ-साथ कुछ मामलों में मेंटेनेंस का खर्च भी बढ़ सकता है। इसलिए पुराने वाहन मालिकों को अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
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E-20 और E-10 वाहनों में कितना अंतर?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि E-20 पेट्रोल का इस्तेमाल E-20 कंप्लायंट वाहन में किया जाता है तो माइलेज में लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। वहीं, यदि यही ईंधन E-10 कंप्लायंट वाहन में इस्तेमाल किया जाए तो माइलेज 8 से 10 प्रतिशत तक घट सकता है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि इथेनॉल मिश्रण से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और वैश्विक तेल संकट के समय कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
एनर्जी डेंसिटी और इंजन क्षमता का भी असर
इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (एनर्जी डेंसिटी) पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसी वजह से समान दूरी तय करने के लिए थोड़ा अधिक ईंधन खर्च हो सकता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि छोटे इंजन वाली गाड़ियों में माइलेज पर असर अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे सकता है, जबकि बड़े इंजन वाली गाड़ियों में इसका प्रभाव कुछ कम हो सकता है। इंजन की तकनीक और वाहन की डिजाइन भी ईंधन दक्षता तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
उपभोक्ताओं को पूरी जानकारी मिलना जरूरी
उपभोक्ता मामलों के जानकारों का कहना है कि वाहन मालिकों को E-20 ईंधन के फायदे और संभावित प्रभावों की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत लोगों का अधिकार है कि उन्हें अपनी भाषा में सही और पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपने वाहन और ईंधन के उपयोग को लेकर सही निर्णय ले सकें।