भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका की तरफ से 12.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने के प्रस्ताव पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने साफ कहा है कि व्यापार से जुड़ी परेशानी का हल एकतरफा फैसला लेकर नहीं निकाला जा सकता। दोनों देशों को बैठकर बातचीत करनी चाहिए। भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि यानी USTR से इस प्रस्ताव पर दोबारा सोचने को कहा है।
धारा 301 की जांच पर भारत को ऐतराज
पूरा मामला अमेरिका की धारा 301 के तहत हुई जांच से जुड़ा है। इस जांच में बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात को लेकर कई देशों पर कार्रवाई की बात कही गई है। भारत का कहना है कि रिपोर्ट में कई कमियां हैं और भारत के खिलाफ ठोस सबूत नहीं दिए गए। भारतीय अधिकारियों ने सवाल उठाया कि बिना पूरी जानकारी और मजबूत सबूत के किसी देश के सामान पर इतना बड़ा अतिरिक्त टैरिफ कैसे लगाया जा सकता है।
सुनवाई में भारत ने रखी अपनी बात
8 जुलाई को हुई सार्वजनिक सुनवाई में वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत बंधुआ मजदूरी को खत्म करने के लिए पूरी तरह गंभीर है। देश के कानून और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत इस मुद्दे पर लगातार काम किया जा रहा है। भारत ने कहा कि अगर किसी देश पर बड़ा टैरिफ लगाना है तो उसके पीछे साफ और भरोसेमंद सबूत होने चाहिए।
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46 देशों को एक साथ रखने पर सवाल
भारत ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि USTR ने भारत समेत 46 देशों को एक ही कैटेगरी में रख दिया। भारत का कहना है कि हर देश के हालात अलग होते हैं। ऐसे में सभी देशों पर एक जैसा नियम लगाना सही नहीं है। रिपोर्ट में यह भी साफ नहीं किया गया कि भारत के पूरे निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की जरूरत क्यों है। भारत ने देश और उद्योग से जुड़े अलग सबूत देने की मांग की है।
भारतीय उद्योग संगठनों ने भी किया विरोध
APEDA, FICCI और CII ने भी अमेरिका के प्रस्तावित टैरिफ का विरोध किया है। उद्योग संगठनों का कहना है कि इसका नुकसान सिर्फ भारतीय कारोबारियों को नहीं होगा। अगर भारतीय सामान महंगा हुआ तो अमेरिका की कंपनियों और वहां के लोगों को भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। APEDA ने चावल के कारोबार को लेकर भी भारत का पक्ष रखा और कहा कि देश में आयात और निर्यात पर सख्त निगरानी होती है।
अब अमेरिका के अगले कदम पर नजर
भारत ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बिना ठोस सबूत के एकतरफा टैरिफ का समर्थन नहीं करेगा। USTR ने मार्च में इस मामले की जांच शुरू की थी और अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सभी देशों और संगठनों की आपत्तियों पर विचार किया जाना है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका 12.5 फीसदी टैरिफ के प्रस्ताव से पीछे हटेगा या भारत-अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर नया विवाद शुरू होगा?