ईस्ट इंडिया कंपनी नाम सुनते ही इतिहास याद आता है, लेकिन अब यही नाम आर्थिक संकट में है। लंदन में रजिस्टर्ड आधुनिक ईस्ट इंडिया कंपनी दोबारा दिवालिया हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी करीब 10 लाख पाउंड यानी लगभग 12 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुका पाई। इसलिए इसे स्वैच्छिक परिसमापन प्रक्रिया में डाल दिया गया है।
कर्ज ज्यादा, संपत्ति बेहद कम
कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज बताते हैं कि उस पर कुल देनदारी 10 लाख पाउंड से अधिक है। हैरानी की बात यह है कि कंपनी की संपत्ति सिर्फ 60 पाउंड के आसपास बताई गई है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 7400 रुपये के बराबर है। इतनी कम संपत्ति के साथ इतना बड़ा कर्ज कंपनी की हालत साफ दिखाता है।
किन-किन का बकाया है पैसा
कंपनी पर अपनी मूल कंपनी EIC Group का लाखों पाउंड बकाया है। इसके अलावा कर्मचारियों का वेतन और ब्रिटेन के टैक्स विभाग का भुगतान भी बाकी है। अलग-अलग मदों में करोड़ों रुपये की देनदारी जुड़ गई है, जिसे कंपनी चुकाने में नाकाम रही।
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2005 में हुआ था पुनर्जीवन
इस आधुनिक कंपनी को साल 2005 में मुंबई के कारोबारी संजीव मेहता ने खरीदा था। उन्होंने पुराने नाम और प्रतीक चिह्न के अधिकार लेकर इसे एक नए ब्रांड के रूप में पेश किया। बाद में करीब 1 करोड़ पाउंड का निवेश कर इसे लग्जरी लाइफस्टाइल ब्रांड बनाया गया, जो चाय, चॉकलेट, ज्वेलरी और अन्य प्रीमियम उत्पाद बेचता था।
कौन हैं संजीव मेहता
संजीव मेहता गुजरात के जैन परिवार से आते हैं और 1989 में ब्रिटेन चले गए थे। उन्होंने मुंबई और अहमदाबाद में पढ़ाई की। जब उन्होंने कंपनी खरीदी थी, तब इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया था। लंदन के मेफेयर इलाके में फ्लैगशिप स्टोर भी खोला गया था, लेकिन अब वह स्टोर खाली पड़ा है और कंपनी की वेबसाइट भी सक्रिय नहीं है।
विडंबना बन गया ऐतिहासिक नाम
कभी यह नाम भारत के औपनिवेशिक इतिहास से जुड़ा था। अब वही नाम आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। 2023 में कंपनी ने एक खास सोने का कलेक्टिबल सिक्का भी लॉन्च किया था, जो चर्चा में रहा। लेकिन फिलहाल सच्चाई यह है कि आधुनिक ईस्ट इंडिया कंपनी कर्ज में डूबकर फिर से इतिहास के मोड़ पर खड़ी है।