भारत तेजी से डिजिटल ताकत के रूप में उभर रहा है। यह बात इकनॉमिक सर्वे में साफ तौर पर सामने आई है। गुरुवार को पेश किए गए सर्वे में बताया गया कि देश ने तकनीक के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं की पहुंच अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रही। गांवों तक भी वही सुविधाएं पहुंच रही हैं, जो कभी सिर्फ बड़े शहरों में मिलती थीं।
5जी नेटवर्क ने घटाई गांव शहर की दूरी
इकनॉमिक सर्वे के मुताबिक देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में अब 5जी नेटवर्क पहुंच चुका है। पिछले 10 वर्षों में टेलीकॉम डेंसिटी 75.23 प्रतिशत से बढ़कर 86.76 प्रतिशत हो गई है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि गांव और शहर के बीच डिजिटल दूरी कम हो गई है। अब गांवों में भी ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल भुगतान और इंटरनेट सेवाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
आम लोगों की जिंदगी में दिखा असर
डिजिटल नेटवर्क के विस्तार से आम लोगों की जिंदगी आसान हुई है। किसान मौसम की जानकारी और सरकारी योजनाएं मोबाइल पर देख पा रहे हैं। छात्र ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं और छोटे कारोबारी डिजिटल माध्यम से अपना काम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
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डेटा सेंटर हब बनने की तैयारी
सरकार भारत को वैश्विक डेटा केंद्र हब बनाने की दिशा में काम कर रही है। इकनॉमिक सर्वे के अनुसार जून 2025 तक देश की डेटा सेंटर क्षमता 1280 मेगावॉट हो चुकी है। अभी देश में 130 निजी और 49 सरकारी डेटा सेंटर काम कर रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्लाउड तकनीक के बढ़ते उपयोग से आने वाले वर्षों में इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।
2030 तक बड़ी छलांग की उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता बढ़कर करीब 4 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। इससे न सिर्फ तकनीकी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए मौके भी बनेंगे। डिजिटल सेवाओं का दायरा और ज्यादा बढ़ेगा, जिससे भारत की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।
अंतरिक्ष में भी भारत का दम
भारत की प्रगति सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी देश ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। 29 जनवरी 2025 को श्रीहरिकोटा से भारत का 100वां लॉन्च किया गया। भारत अब सैटेलाइट डॉकिंग तकनीक हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। फिलहाल देश के पास 56 सक्रिय अंतरिक्ष संपत्तियां हैं, जो संचार, नेविगेशन और धरती की निगरानी में काम कर रही हैं।