अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने 1,021 करोड़ रुपये की नई संपत्तियां अटैच की हैं। यह कार्रवाई रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड यानी RHFL और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड यानी RCFL से जुड़े मामले में हुई है। ED के मुताबिक, अब तक इस पूरे मामले में कुल 20,367 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई हो सकती है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
ED ने इस मामले की जांच CBI की कई FIR के आधार पर शुरू की थी। ये FIR अलग-अलग सरकारी और निजी बैंकों की शिकायतों के बाद दर्ज हुई थीं। जांच एजेंसी का आरोप है कि RHFL और RCFL ने बैंकों और दूसरी संस्थाओं से जुटाए गए करीब 15,548 करोड़ रुपये के फंड को दूसरी जगह भेजा। ED का दावा है कि शेल कंपनियों और ग्रुप से जुड़ी कई कंपनियों के जरिए पैसों का लेन-देन किया गया। अब एजेंसी इसी पूरे पैसे के रास्ते को समझने में जुटी है।
इस बार ED ने क्या-क्या अटैच किया?
ED के मुताबिक, नई कार्रवाई में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के पास मौजूद रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर भी शामिल हैं। इसके अलावा सासन पावर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड से मिलने वाली कुछ लोन रकम को भी अटैच किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये संपत्तियां कथित अपराध से हुई कमाई से जुड़ी हैं। हालांकि मामले में अंतिम फैसला अदालत और जांच की आगे की प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा।
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80 से ज्यादा जगहों पर हो चुकी छापेमारी
ED के मुताबिक, अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े मामलों में PMLA के तहत चार केस और FEMA के तहत तीन अलग मामले दर्ज हैं। जांच के दौरान अब तक 80 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की जा चुकी है। इन छापों में एजेंसी ने कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और पैसों के लेन-देन से जुड़ी जानकारी जुटाने का दावा किया है। PMLA के तहत चार चार्जशीट अदालत में दाखिल की जा चुकी हैं।
आठ अधिकारियों और करीबियों की गिरफ्तारी
इस पूरे मामले में जांच एजेंसी अब तक ग्रुप से जुड़े आठ वरिष्ठ अधिकारियों और करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार कर चुकी है। ED के मुताबिक, सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। FEMA के तहत भी एक शिकायत दर्ज की गई है और 77.86 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर डायवर्ट किया गया पैसा किन-किन कंपनियों और खातों तक पहुंचा।
अब आगे क्या होने वाला है?
ED का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT बनाई गई है। यह टीम पूरे मामले की जांच तेजी से कर रही है। फोकस इस बात पर है कि बैंकों से जुटाए गए पैसे का कथित तौर पर कैसे इस्तेमाल हुआ और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। फिलहाल 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां अटैच होने के बाद मामला और बड़ा हो गया है। अब नजर इस बात पर है कि जांच में आगे कौन सा नया नाम या नया लेन-देन सामने आता है।