ED conducts major raids: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 597 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कई राज्यों में छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और बेंगलुरु में कुल 19 ठिकानों पर तलाशी ली। इस दौरान ईडी ने 90 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया और कई डिजिटल तथा दस्तावेजी साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं। यह मामला सरकारी धन के कथित गबन और उसे फर्जी कंपनियों के जरिए इधर-उधर करने से जुड़ा बताया जा रहा है।
चार राज्यों में छापेमारी
ईडी के अनुसार 12 मार्च को चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी खातों से जुड़ी लगभग 597 करोड़ रुपये की राशि का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। यह पैसा बैंक में सावधि जमा के रूप में रखा जाना था, लेकिन आरोपियों ने बिना अनुमति के इसका उपयोग कर लिया।
पैसों की हेराफेरी
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कई शेल कंपनियों के जरिए सरकारी धन को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया। स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज और अन्य संस्थाओं के नाम सामने आए हैं। एजेंसी के मुताबिक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि और अभय कुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में है। बताया गया कि गबन की गई रकम का कुछ हिस्सा उनके और उनके परिवार के खातों में भी पहुंचा।
यह भी देखेंःElection Commissioner Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का महाभियोग नोटिस
फर्जी बिलों का इस्तेमाल
ईडी की जांच में यह भी पता चला कि बड़ी रकम को ज्वैलर्स के खातों में भेजकर सोना खरीदने का दिखावा किया गया। इसके लिए फर्जी बिलों का सहारा लिया गया, ताकि पैसों के लेन-देन को वैध दिखाया जा सके। एजेंसी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पिछले करीब एक साल से चल रही थी और इसमें कई फर्जी कंपनियों की मदद ली गई।
आरोपी फरार
मामले में रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि उसने बड़ी मात्रा में धन अपने खातों में लेकर उसे अलग-अलग रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश किया। तलाशी के दौरान कई संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। हालांकि छापेमारी के समय विक्रम वाधवा नहीं मिला और वह फिलहाल फरार बताया जा रहा है। ईडी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे हो सकते हैं।