प्रवर्तन निदेशालय ने आर्थिक अपराधों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मोहम्मद इकबाल को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करवा दिया है। 31 मार्च 2026 को कोर्ट ने फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट के तहत यह फैसला सुनाया। सुनवाई कर रहे जज राहुल प्रकाश ने सख्त रुख अपनाते हुए इकबाल से जुड़ी तीन बड़ी चीनी मिलों को जब्त करने का आदेश दिया। इस फैसले को ईडी की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
1000 करोड़ की संपत्ति होगी जब्त
कोर्ट के आदेश के बाद जिन चीनी मिलों को जब्त किया जाएगा, उनकी अनुमानित कीमत करीब 1000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। अब ये संपत्तियां सरकार के कब्जे में चली जाएंगी। बताया जा रहा है कि इकबाल लंबे समय से जांच एजेंसियों से बच रहा था और कानूनी प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहा था। ऐसे में इस कानून के तहत कार्रवाई जरूरी हो गई थी।
FEOA के तहत क्यों अहम है ये फैसला
फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट उन लोगों पर लागू होता है जो आर्थिक अपराध कर देश छोड़ देते हैं और वापस नहीं आते। इस कानून के जरिए उनकी संपत्तियां जब्त की जाती हैं ताकि नुकसान की भरपाई हो सके। ईडी के लखनऊ जोन की इस कार्रवाई ने साफ संदेश दिया है कि कानून से भागने वालों को अब सीधे आर्थिक चोट दी जाएगी।
कौन है मोहम्मद इकबाल?
मोहम्मद इकबाल उत्तर प्रदेश का चर्चित खनन माफिया और पूर्व एमएलसी रहा है। उस पर मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध खनन के कई गंभीर आरोप हैं। 2024 में भी ईडी ने उसकी अवैध यूनिवर्सिटी को जब्त किया था, जिसे उसके परिवार द्वारा संचालित किया जा रहा था। उसकी संपत्ति और नेटवर्क को लेकर लंबे समय से जांच चल रही थी।
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सत्ता से शिखर तक और फिर गिरावट
खनन के कारोबार से इकबाल ने भारी संपत्ति बनाई और प्रदेश की राजनीति में मजबूत पकड़ बना ली। उसके संपर्क में बड़े नेता और अधिकारी तक शामिल बताए जाते थे। लेकिन 2017 में चुनाव हारने के बाद उसका पतन शुरू हुआ। इसके बाद उसके खिलाफ जांच तेज हुई और पुलिस ने उसे गैंग लीडर घोषित कर दिया।
परिवार पर भी कसा शिकंजा
जांच के दौरान उसके भाई महमूद अली, बेटों और करीबी सहयोगियों पर भी कार्रवाई हुई। कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि इकबाल खुद देश छोड़कर फरार हो गया। अब कोर्ट के इस फैसले के बाद उसकी संपत्तियों पर बड़ा एक्शन हुआ है। यह मामला बताता है कि कानून से बचने की कोशिश आखिरकार भारी पड़ती है।