8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। आयोग विभिन्न राज्यों और कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें कर रहा है। इन बैठकों में वेतन बढ़ोतरी, फिटमेंट फैक्टर और पुरानी पेंशन योजना समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो रही है। फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन कर्मचारियों की मांगों ने बहस को तेज कर दिया है।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर
फिटमेंट फैक्टर वह आधार होता है जिसके जरिए पुरानी बेसिक सैलरी को नई बेसिक सैलरी में बदला जाता है। पिछले वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। इसी वजह से न्यूनतम बेसिक वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गया था। महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और पेंशन जैसी कई सुविधाएं भी इसी बेसिक वेतन पर निर्भर करती हैं।
कर्मचारियों की क्या मांग
कई कर्मचारी संगठनों ने इस बार फिटमेंट फैक्टर को 2.86 से 3.68 तक बढ़ाने की मांग रखी है। वहीं कुछ संगठनों ने अलग-अलग वेतन स्तरों के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है। उनके अनुसार निचले स्तर के कर्मचारियों को 2.92 और उच्च स्तर के अधिकारियों को 4.38 तक का फिटमेंट फैक्टर मिलना चाहिए।
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कितनी बढ़ सकती है सैलरी
प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 52,600 रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं उच्च स्तर के अधिकारियों की मौजूदा 2.50 लाख रुपये की बेसिक सैलरी सैद्धांतिक रूप से 10.95 लाख रुपये तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हालांकि यह केवल कर्मचारियों की मांग है, सरकार की मंजूरी अभी बाकी है।
सरकार ने नहीं किया ऐलान
महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी तक केंद्र सरकार ने फिटमेंट फैक्टर या वेतन बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। आयोग पहले सभी सुझावों और मांगों का अध्ययन करेगा, फिर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। इसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
फिलहाल इंतजार जारी
लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों की नजर अब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी है। अगर फिटमेंट फैक्टर में बड़ा बदलाव होता है तो कर्मचारियों के वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। लेकिन फिलहाल यह केवल प्रस्ताव और मांगों के स्तर पर है। अंतिम तस्वीर आयोग की रिपोर्ट और सरकार के फैसले के बाद ही साफ होगी।