
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान आज शाम 4 बजे होने जा रहा है। इस दौरान चुनाव आयोग यह भी बताएगा कि राज्य में कितने चरणों में मतदान होगा। सूत्रों के अनुसार, आयोग इस बार कम चरणों में चुनाव संपन्न कराने पर विचार कर रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आयोग किसी राज्य में मतदान के चरण कैसे तय करता है — क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक और रणनीतिक फार्मूला होता है? इसका जवाब है, हाँ। आयोग का निर्णय राजनीति नहीं, बल्कि सुरक्षा, भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक प्रबंधन पर आधारित होता है।
सुरक्षा रिपोर्ट और संसाधनों के आधार पर तय होती रणनीति
चुनाव आयोग सबसे पहले गृह मंत्रालय, खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन से रिपोर्ट मांगता है। इन रिपोर्टों में बताया जाता है कि कौन-से इलाके संवेदनशील या नक्सल प्रभावित हैं, कहां कानून-व्यवस्था की चुनौती है, और कहां सुरक्षा बलों की तैनाती की जरूरत होगी। आयोग इन आंकड़ों के आधार पर तय करता है कि क्या पूरे राज्य में एक साथ मतदान संभव है या इसे चरणबद्ध तरीके से कराना होगा। जिन राज्यों में सुरक्षा स्थिति बेहतर और संसाधन पर्याप्त होते हैं, जैसे केरल, गोवा या तमिलनाडु, वहां अक्सर चुनाव एक ही चरण में संपन्न हो जाते हैं।
बड़े और संवेदनशील राज्यों में होता है चरणबद्ध मतदान
वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े या संवेदनशील राज्यों में मतदान कई चरणों में कराया जाता है। इसकी एक प्रमुख वजह यह भी है कि देश में अर्धसैनिक बलों की सीमित संख्या होती है, जिन्हें एक चरण के बाद दूसरे क्षेत्र में भेजा जाता है। आयोग मौसम और स्थानीय त्योहारों को भी ध्यान में रखता है ताकि मतदान में बाधा न आए। अंततः आयोग प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्यवार मतदान की तारीखें, चरण और मतगणना की तिथि घोषित करता है। यानी हर राज्य के भौगोलिक, सामाजिक और सुरक्षा ढांचे को देखकर ही यह तय होता है कि चुनाव एक चरण में होगा या कई चरणों में।