ED Takes Strict Action Against: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में यह सामने आया है कि इंद्रजीत सिंह यादव अपनी अवैध कमाई को छिपाने और इधर-उधर खपाने के लिए सुनील गुप्ता और अमन कुमार का सहारा ले रहा था। इसी लेन-देन और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के चलते इंद्रजीत ईडी की रडार पर आया। 30 दिसंबर 2025 को शुरू हुई छापेमारी में दिल्ली के सर्वप्रिय विहार और वेस्ट एंड ग्रीन फार्म्स सहित कई ठिकानों पर कार्रवाई की गई। अब तक ईडी ने करीब 6 करोड़ रुपये नकद, लगभग 17 करोड़ रुपये के सोने-हीरे के गहने और करीब 35 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि यह संपत्ति अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से अर्जित की गई है।
सुनील और अमन की भूमिका
ईडी की शुरुआती जांच में पता चला है कि सुनील गुप्ता और अमन कुमार, इंद्रजीत के लिए पैसों के लेन-देन की अहम कड़ी थे। अमन कुमार को इंद्रजीत का करीबी और सहयोगी बताया जा रहा है, जबकि सुनील गुप्ता ने पहले अमन को कर्ज दिया था। जांच में यह भी सामने आया है कि ईडी की कार्रवाई शुरू होने के बाद अमन कुमार ने कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम को बचाने के लिए बड़ी राशि सुनील गुप्ता को ट्रांसफर की। वेस्ट एंड ग्रीन फार्म्स में सुनील गुप्ता के घर और फार्महाउस पर हुई छापेमारी में 1.22 करोड़ रुपये नकद और करीब 8.50 करोड़ रुपये के गहने बरामद किए गए हैं। इन लेन-देन को मनी लॉन्ड्रिंग के संदिग्ध प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
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कुख्यात छवि और आपराधिक इतिहास
ईडी ने इंद्रजीत सिंह यादव को एक संगठित आपराधिक नेटवर्क का मुख्य चेहरा बताया है। एजेंसी के अनुसार, इंद्रजीत अपराध, अवैध वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई मामलों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ हत्या, जबरन वसूली, धोखाधड़ी, जमीन कब्जा, हथियारों के बल पर धमकी और हिंसक गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोप हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, इंद्रजीत पर 15 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। सोशल मीडिया पर भी उसकी मजबूत मौजूदगी है और उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब 12 लाख फॉलोअर्स बताए जाते हैं। ईडी का कहना है कि अब तक की कार्रवाई में इंद्रजीत और उसके करीबियों से लगभग 50 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है और मामले में आगे की जांच अभी जारी है।