देशभर के नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। जिन कर्मचारियों की सैलरी 15 हजार रुपये से थोड़ी ज्यादा है और जो अब तक कर्मचारी भविष्य निधि के दायरे से बाहर थे, उनके लिए उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित विभाग को साफ निर्देश दिए हैं कि ईपीएफ के लिए तय सैलरी लिमिट बढ़ाने या न बढ़ाने पर चार महीने के भीतर अंतिम फैसला लिया जाए। यह आदेश उन कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है जो सालों से इस नियम में बदलाव का इंतजार कर रहे हैं।
क्यों उठ रहा है सैलरी लिमिट बढ़ाने का मुद्दा
फिलहाल ईपीएफ के लिए सैलरी लिमिट 15 हजार रुपये प्रतिमाह तय है। जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता इस सीमा के अंदर है, उनके लिए ईपीएफ में योगदान अनिवार्य होता है। यह सीमा सितंबर 2014 से अब तक नहीं बदली है। इस दौरान महंगाई, जीवनयापन का खर्च और सैलरी स्ट्रक्चर काफी बदल चुका है। ऐसे में बड़ी संख्या में कर्मचारी इस सामाजिक सुरक्षा योजना से बाहर रह जाते हैं।
जनहित याचिका पर आया सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया है। अदालत ने माना कि मौजूदा वेतन सीमा आज की आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि आखिर इतने सालों से इस सीमा में बदलाव क्यों नहीं किया गया। साथ ही यह भी कहा गया है कि अब इस मुद्दे को और टालने की गुंजाइश नहीं है और तय समय में स्पष्ट फैसला लेना होगा।
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चार महीने की डेडलाइन का मतलब क्या है
सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय की गई चार महीने की समय-सीमा का सीधा मतलब है कि अब सरकार को या तो सैलरी लिमिट बढ़ाने का ऐलान करना होगा या फिर इसके पीछे ठोस वजह बतानी होगी। अगर सीमा बढ़ाई जाती है तो यह भी साफ करना होगा कि नई व्यवस्था कब से लागू होगी। इससे ईपीएफ को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता खत्म होने की उम्मीद है।
न्यूनतम मजदूरी और ईपीएफ का अंतर
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र और कई राज्य सरकारों द्वारा तय की गई न्यूनतम मजदूरी कई जगह 15 हजार रुपये से ज्यादा है। इसके बावजूद ईपीएफ की सीमा कम बनी हुई है। इस वजह से बड़ी संख्या में कर्मचारी इस योजना से बाहर रह जाते हैं और उन्हें भविष्य के लिए जरूरी आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाती।
आगे क्या बदल सकता है कर्मचारियों के लिए
अगर सरकार सैलरी लिमिट बढ़ाने का फैसला लेती है तो इसका सीधा फायदा लाखों कर्मचारियों को मिलेगा। ज्यादा लोग ईपीएफ के दायरे में आएंगे और रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित बचत कर पाएंगे। अब सभी की नजरें अगले चार महीनों पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि सरकार इस अहम मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।