केंद्रीय बजट 2026 आने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है और इससे पहले किसानों की नजरें सरकार पर टिकी हैं। देश का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर है और बढ़ती महंगाई ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खाद बीज डीजल और कीटनाशकों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में किसान चाहते हैं कि इस बजट में उन्हें सीधी राहत दी जाए। खासतौर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर उम्मीदें तेज हो गई हैं।
पीएम किसान योजना में कितनी मिलती है मदद
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अभी किसानों को सालाना छह हजार रुपये की सहायता मिलती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना की शुरुआत साल 2018 में की गई थी और इसका मकसद छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहारा देना है। इस योजना से करोड़ों किसान जुड़े हुए हैं लेकिन मौजूदा हालात में किसानों का कहना है कि छह हजार रुपये अब काफी नहीं रह गए हैं।
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क्यों बढ़ाने की मांग हो रही है रकम
किसानों का कहना है कि खेती की लागत पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। खेत की जुताई से लेकर फसल कटाई तक हर काम पर खर्च बढ़ गया है। ऐसे में साल भर में मिलने वाली छह हजार रुपये की मदद जरूरतों के मुकाबले बहुत कम पड़ती है। यही वजह है कि किसान संगठन और ग्रामीण इलाकों से यह मांग उठ रही है कि सरकार इस रकम को बढ़ाकर दस हजार रुपये सालाना करे। अगर ऐसा होता है तो किसानों को खेती में निवेश करने में मदद मिलेगी और उत्पादन बढ़ाने का रास्ता भी खुलेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा
अगर बजट 2026 में पीएम किसान योजना की रकम बढ़ाई जाती है तो इसका असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। किसानों के हाथ में ज्यादा पैसा आने से उनकी खरीद क्षमता बढ़ेगी। इससे गांवों में बाजार मजबूत होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सीधी नकद सहायता बढ़ने से खेती के साथ-साथ दूसरे छोटे कारोबार भी मजबूत हो सकते हैं। अब देखना यह है कि बजट में नरेंद्र मोदी सरकार किसानों की इस उम्मीद पर कितना खरा उतरती है।