पीएफ यानी प्रोविडेंट फंड नौकरीपेशा लोगों के लिए भविष्य की बचत का बड़ा जरिया माना जाता है। हर महीने कर्मचारी की सैलरी का एक हिस्सा पीएफ खाते में जमा होता है, जो रिटायरमेंट या जरूरत के समय काम आता है। हालांकि पीएफ निकालने के नियमों को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। खासकर यह कि पैसा कितनी बार निकाला जा सकता है और किन परिस्थितियों में पूरा फंड निकाला जा सकता है।
एक महीने में कितनी बार निकाल सकते हैं पैसा
ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक एक महीने में पीएफ निकासी के लिए आवेदन करने की कोई तय सीमा नहीं है। लेकिन हर बार निकासी का कारण अलग होना चाहिए। कर्मचारी शादी, घर खरीदने, इलाज या अन्य स्वीकृत जरूरतों के लिए एडवांस क्लेम कर सकता है। एक बार एडवांस निकालने के बाद दूसरी बार आवेदन करने के लिए आमतौर पर कम से कम एक महीने का अंतर जरूरी माना जाता है।
कब निकाल सकते हैं पूरा पीएफ
अगर कोई कर्मचारी रिटायर हो जाता है या नौकरी छोड़ने के बाद लगातार दो महीने तक बेरोजगार रहता है, तो वह अपने पीएफ खाते की पूरी राशि निकाल सकता है। यदि कर्मचारी इस दौरान दूसरी नौकरी जॉइन कर लेता है तो पूरा पीएफ निकालने की अनुमति नहीं मिलती। ऐसे मामलों में पुराने खाते को नए नियोक्ता के पीएफ खाते में ट्रांसफर कराया जा सकता है।
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शादी, घर और इलाज के लिए सुविधा
ईपीएफओ कर्मचारियों को विशेष जरूरतों के लिए भी पैसा निकालने की अनुमति देता है। अपनी या परिवार के सदस्य की शादी के लिए कर्मचारी अपने हिस्से की जमा राशि का 50 प्रतिशत तक निकाल सकता है, बशर्ते उसकी सदस्यता कम से कम 7 साल पुरानी हो। इसके अलावा घर खरीदने, मकान बनाने, होम लोन चुकाने या गंभीर बीमारी के इलाज के लिए भी पीएफ से निकासी की जा सकती है। मेडिकल इमरजेंसी के मामले में न्यूनतम नौकरी अवधि की शर्त लागू नहीं होती।
कितने दिन में खाते में आता है पैसा
ऑनलाइन क्लेम मंजूर होने के बाद आमतौर पर 7 से 15 कार्यदिवस के भीतर राशि बैंक खाते में पहुंच जाती है। इसके लिए यूएएन सक्रिय होना जरूरी है। साथ ही आधार, पैन और बैंक खाते की जानकारी ईपीएफओ रिकॉर्ड में अपडेट और केवाईसी सत्यापित होनी चाहिए। दस्तावेजों में किसी भी तरह की त्रुटि होने पर क्लेम में देरी हो सकती है।
टैक्स और अन्य जरूरी बातें
अगर कोई कर्मचारी लगातार 5 साल की सेवा पूरी करने से पहले पीएफ निकालता है, तो कुछ मामलों में टैक्स और टीडीएस लागू हो सकता है। वहीं 5 साल या उससे अधिक की सेवा के बाद निकाली गई राशि आमतौर पर टैक्स मुक्त रहती है। नौकरी बदलने की स्थिति में पीएफ निकालना जरूरी नहीं होता। विशेषज्ञों की सलाह है कि क्लेम करने से पहले ईपीएफओ के ताजा नियम जरूर देख लें, क्योंकि समय-समय पर इनमें बदलाव होते रहते हैं।