Alternative Fuel Vehicles : केंद्र सरकार ने कमर्शियल वाहन क्षेत्र को राहत देने के लिए मोटर व्हीकल नियमों में कई अहम बदलावों का प्रस्ताव रखा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के मसौदे के अनुसार इलेक्ट्रिक (EV), सीएनजी और हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले कमर्शियल वाहनों की निर्धारित परिचालन आयु 5 साल तक बढ़ाई जा सकती है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो ट्रांसपोर्ट कंपनियां अपने वाहनों का उपयोग पहले से अधिक समय तक कर सकेंगी।
ट्रांसपोर्ट कंपनियों को होगा फायदा
प्रस्तावित बदलाव का सबसे बड़ा लाभ बस, ट्रक और मालवाहक वाहनों का बड़ा बेड़ा संचालित करने वाली कंपनियों को मिल सकता है। वाहनों की उपयोग अवधि बढ़ने से नए वाहन खरीदने की जरूरत टल सकती है और पूंजीगत खर्च में कमी आ सकती है। इससे ऑपरेशनल लागत घटाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
चेसिस रजिस्ट्रेशन नियमों में बदलाव
मंत्रालय ने बिना बॉडी वाले चेसिस के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन नियमों में भी संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत ऐसे चेसिस को 6 महीने तक का अस्थायी रजिस्ट्रेशन दिया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर इसे 30-30 दिन के अंतराल पर बढ़ाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे वाहन निर्माताओं और बॉडी बिल्डरों को अतिरिक्त समय मिल सकेगा।
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दूसरे राज्यों में रजिस्ट्रेशन होगा आसान
पूरी तरह तैयार वाहन को दूसरे राज्य में रजिस्टर कराने या किसी वाहन को विशेष उपयोग के लिए परिवर्तित करने की स्थिति में 45 दिन तक का अस्थायी रजिस्ट्रेशन देने का प्रस्ताव है। इससे वाहन मालिकों और कंपनियों को अंतरराज्यीय प्रक्रियाओं में सुविधा मिल सकती है और कागजी औपचारिकताएं आसान हो सकती हैं।
नेशनल परमिट होगा ज्यादा डिजिटल
सरकार ने नेशनल परमिट प्रणाली को भी अधिक डिजिटल बनाने की योजना बनाई है। प्रस्ताव के मुताबिक, नेशनल परमिट इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जारी किया जा सकेगा। वाहन मालिक 1 वर्ष से लेकर 5 वर्ष तक की अवधि का विकल्प चुन सकेंगे। प्रस्तावित वार्षिक शुल्क 16,500 रुपये रखा गया है। साथ ही परमिट में बीमा, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र और लंबित चालान जैसी जानकारियां भी दिखाई देंगी।
ऑटो सेक्टर और डीलरों को भी राहत
मसौदे में ऑटो कंपोनेंट कंपनियों को मोटर व्हीकल नियम 33 के दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव है, जिससे अनुसंधान और नए उत्पाद विकास को बढ़ावा मिल सके। वहीं, VAHAN डेटाबेस के जरिए GST, PAN, उद्यम आधार और CIN जैसी जानकारियां स्वतः उपलब्ध कराने की योजना है। मंत्रालय ने इन प्रस्तावित बदलावों पर 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं, जिसके बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।