Sugar Jaggery Prices : त्योहारों के मौसम से पहले रसोई का बजट बिगड़ता नजर आ रहा है। पिछले 15 दिनों में चीनी के दाम में करीब 17 रुपये प्रति किलो और गुड़ के दाम में करीब 40 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका असर घरों से लेकर मिठाई, बेकरी और खाद्य कारोबार तक दिखाई देने लगा है। बढ़ती कीमतों ने आम लोगों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
पुराने और नए भाव में बड़ा फर्क
कारोबारियों के अनुसार, करीब 15 दिन पहले गुड़ 60 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रहा था, जो अब 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं चीनी का भाव 48 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 62 से 65 रुपये प्रति किलो हो गया है। सूखे मेवों के दाम में भी तेजी देखी जा रही है। बादाम, जो एक महीने पहले 900 रुपये किलो मिल रहा था, अब करीब 1100 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
मिठाई कारोबार पर बढ़ेगा असर
चीनी और गुड़ की कीमत बढ़ने का सीधा असर मिठाई, चाय, बेकरी और डेयरी उत्पादों पर पड़ सकता है। त्योहारों के दौरान इन वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है, ऐसे में लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं को महंगे उत्पाद खरीदने पड़ सकते हैं। छोटे कारोबारियों का कहना है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से मुनाफा घटने की आशंका है।
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क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
थोक कारोबारियों का कहना है कि इस साल अनुमान के मुकाबले कम चीनी उत्पादन हुआ है। जहां करीब 3.20 लाख टन उत्पादन की उम्मीद थी, वहीं लगभग 2.80 लाख टन चीनी ही तैयार हुई। इसके अलावा निर्यात और मांग के दबाव का भी असर बाजार पर देखने को मिला है। हालांकि बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 1 अगस्त से स्टॉक लिमिट भी लागू कर दी है।
एथेनॉल को भी बताया जा रहा वजह
कुछ कारोबारियों का दावा है कि एथेनॉल उत्पादन में गन्ने और चीनी के उपयोग बढ़ने से भी बाजार में दबाव बना है। इसी वजह से चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों की राय अलग है और सरकार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने से जोड़कर देखती है।
दिवाली से पहले बढ़ सकती है चिंता
त्योहारी सीजन में चीनी और गुड़ की मांग बढ़ना तय माना जाता है। ऐसे में यदि कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो मिठाई और खाद्य उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं। व्यापारियों ने सरकार से बाजार पर नजर रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है, ताकि त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।