Children Screen Time: आज के आधुनिक दौर में बच्चों को तकनीक और डिजिटल गैजेट्स से पूरी तरह दूर रखना नामुमकिन हो चुका है। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, मोबाइल फोन बच्चों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन बच्चों के लिए स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल उनकी सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। ऐसे में असली चुनौती यह है कि बच्चे इस स्क्रीन का इस्तेमाल कैसे और कितनी देर कर रहे हैं। ज्यादातर माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि बच्चों की मोबाइल की लत को कैसे कम किया जाए ताकि उनकी सेहत खराब न हो। इसी चिंता को देखते हुए सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने एक खास अभियान की शुरुआत की है।
प्रधानमंत्री ने क्या कहा
आपको बता दें कि हाल ही में सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने बच्चों में अच्छी डिजिटल आदतें डालने के लिए एक खास अभियान शुरू किया है। जिसका नाम 'स्क्रीन स्मार्ट फ्रॉम द स्टार्ट' है। इस दौरान उन्होंने माता-पिता, स्कूलों और समुदायों से मिलकर बच्चों के लिए बेहतर डिजिटल माहौल बनाने की अपील की। उन्होंने सबसे पहले परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय को स्क्रीन से मुक्त रखने पर जोर दिया।
खाने की टेबल नो मोबाइल फोन
प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग का कहना है कि जब भी परिवार एक साथ बैठा हो या सब मिलकर खाना खा रहे हों, तो मोबाइल फोन को बिल्कुल दूर रख देना चाहिए। अगर हर कोई अपने फोन में लगा रहेगा, तो परिवार के बीच की बातचीत और आपसी जुड़ाव खत्म होने लगेगा।
बच्चों के कमरे को 'मोबाइल-फ्री ज़ोन' बनाएं
बच्चों के कमरे को 'मोबाइल-फ्री ज़ोन' बनाना चाहिए। अगर रात में बच्चों के कमरे में फोन रहेगा, तो वे छिपकर देर तक स्क्रीन देखते रहेंगे। इससे उनकी नींद खराब होगी, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत नुकसानदेह है।
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स्मार्टफोन देने में जल्दबाजी न करें
प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने सुझाव दिया है कि बच्चों को बहुत छोटी उम्र में स्मार्टफोन नहीं देना चाहिए। अगर किसी बच्चे को सिर्फ माता-पिता से संपर्क करने के लिए फोन की जरूरत है, तो बच्चे को शुरुआत में एक साधारण फोन ही दें। इससे बच्चे धीरे-धीरे और जिम्मेदारी से तकनीक का इस्तेमाल करना सीखेंगे।
मोबाइल देखने के नुकसान?
आपको बता दें मार्च 2025 में 3 से 7 साल के बच्चों की डिजिटल आदतों का एनालिसिस किया गया। जिसमें खुलासा हुआ कि स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की नींद, फिजिकल एक्टिविटी और डेली रूटीन को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा जरूरत से ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है, वे ज्यादा जिद्दी या चिड़चिड़े हो रहे हैं। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब मोबाइल की वजह से बच्चे बाहर खेलना, दोस्तों से बात करना और परिवार के साथ समय बिताना छोड़ देते हैं।