Scam Worth Rs 1464 Crore: कर्नाटक सरकार के वाणिज्य कर विभाग की प्रवर्तन शाखा (दक्षिण क्षेत्र) ने एक बड़े अंतरराज्यीय फर्जी बिलिंग रैकेट का खुलासा किया है, जिसकी अनुमानित राशि 1,464 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि कर्नाटक और तमिलनाडु में सीमेंट, लोहा-इस्पात और निर्माण सामग्री के नाम पर कागज़ी लेन-देन दिखाकर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जा रही थी। अब तक करीब 355 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के गलत दावों का पता चला है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा।
तकनीकी निगरानी से सामने आया पूरा नेटवर्क
यह घोटाला विभाग के उन्नत जीएसटी एनालिटिक्स सिस्टम और ‘नॉन-जेन्युइन टैक्सपेयर्स (NGTP)’ मॉड्यूल की मदद से पकड़ में आया। संदिग्ध आईपी एड्रेस, असामान्य बिलिंग पैटर्न और आपस में जुड़े आईटीसी ट्रांजैक्शन से शक गहराया। इसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु के कई शहरों में एक साथ छापेमारी की गई। जांच में सामने आया कि फर्जी स्टांप पेपर, जाली किरायानामे, नकली हस्ताक्षर और झूठे नोटरी दस्तावेज़ों के जरिए कई कंपनियों के नाम पर जीएसटी पंजीकरण कराया गया था।
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चार गिरफ्तार, अहम सबूत जब्त
छापेमारी के दौरान बेंगलुरु, चेन्नई, वेल्लोर और पेरनामपट्टू से 24 मोबाइल फोन, 51 सिम कार्ड, पेन ड्राइव, बैंक दस्तावेज़ और कई कंपनियों की मुहरें जब्त की गईं। मामले में चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर फर्जी कंपनियां बनाकर आईटीसी का गलत लाभ लेने का आरोप है। सभी आरोपियों को विशेष आर्थिक अपराध अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। विभाग का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।