US-Iran ceasefire: फारूक अब्दुल्ला ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान केवल संवाद के जरिए ही संभव है और युद्ध कभी स्थायी शांति नहीं ला सकता। साथ ही उन्होंने पश्चिम एशिया में जल्द शांति बहाल होने की उम्मीद जताई।
बातचीत ही समाधान
बुधवार को मीडिया से बातचीत में अब्दुल्ला ने कहा कि यह अच्छी बात है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं होता, बल्कि बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश आपसी बातचीत के जरिए आगे का समाधान निकालेंगे।
युद्ध का असर
अब्दुल्ला ने कहा कि इस संघर्ष ने केवल संबंधित देशों को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता, तो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और आर्थिक मुश्किलें और बढ़ सकती थीं। ऐसे में युद्धविराम का फैसला राहत देने वाला है।
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लोगों की चिंता
उन्होंने खासतौर पर जम्मू-कश्मीर के उन लोगों की चिंता जताई जो अरब देशों में काम करते हैं। उनके अनुसार, इस तनाव का सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण इन लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है और शांति बहाल होना बेहद जरूरी है।
अहम भूमिका
अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि भारत इस तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के अमेरिका से अच्छे संबंध हैं, इसलिए वह मध्यस्थता कर सकता है। साथ ही उन्होंने फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत के रुख में बदलाव को लेकर भी चिंता जताई और इसे देश के लिए अच्छा संकेत नहीं बताया।