Us Iran War Ceasefire: डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने इस समझौते का श्रेय पाकिस्तान को दिया, लेकिन साथ ही एक बड़ा संकेत भी दिया कि चीन ने भी पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभाई हो सकती है।
ट्रंप के बयान से बढ़ा चीन का शक
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या बीजिंग ने तेहरान को बातचीत के लिए तैयार किया, तो उन्होंने कहा कि “ऐसा सुना है।” इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि सीजफायर में चीन की भूमिका कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए चीन लगातार सक्रिय रहा और उसने बैकडोर डिप्लोमेसी के जरिए ईरान पर दबाव बनाया।
कई देशों की भागीदारी
मार्च के अंत में इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्किए, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी। इसके बाद चीन और पाकिस्तान ने मिलकर पांच सूत्रीय शांति पहल का ऐलान किया, जिसमें तत्काल सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की अपील शामिल थी।
यह भी देखेंःCustodial Death Case: कस्टोडियल डेथ केस में बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों को राहत देने से किया इनकार
प्रस्तावों पर दिखाई सहमति
ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका ने दो सप्ताह के लिए हमले रोकने पर सहमति जताई है और ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को व्यावहारिक बताया। वहीं ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित बातचीत को स्वीकार कर लिया। ईरान ने यह भी दावा किया कि इस संघर्ष में उसकी जीत हुई है, हालांकि उसने भविष्य में हमले की स्थिति में जवाब देने की चेतावनी भी दी है।
मुलाकातों पर टिकी नजर
सीजफायर के बाद अब निगाहें ट्रंप की प्रस्तावित बीजिंग यात्रा पर हैं, जहां उनकी मुलाकात शी जिनपिंग से होनी है। यह बैठक मई में प्रस्तावित है और इसे वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में क्षेत्रीय स्थिरता और आगे की रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है।