सरकारी बैंकों को लेकर केंद्र सरकार एक बड़े बदलाव की तैयारी में है। खबर है कि सरकारी बैंकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI की सीमा बढ़ाकर 49 फीसदी तक की जा सकती है। अभी यह सीमा 20 फीसदी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रस्ताव पर सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों के बीच चर्चा चल रही है। हालांकि अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि बैंकिंग सेक्टर में बड़े सुधार की जमीन तैयार की जा रही है।
सरकार क्या कहना चाहती है इस प्रस्ताव पर
फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्रेटरी एम नागराजू ने कहा है कि सरकार मंत्रालयों के साथ इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रही है। इससे पहले खबर आई थी कि वित्त मंत्रालय इस विषय पर रिजर्व बैंक से भी सलाह ले चुका है। सरकार का कहना है कि अगर FDI सीमा बढ़ती भी है, तो सरकारी बैंकों में उसकी हिस्सेदारी 51 फीसदी से नीचे नहीं लाई जाएगी। यानी नियंत्रण सरकार के हाथ में ही रहेगा।
171 लाख करोड़ की संपत्ति पर विदेशी नजर
मार्च 2025 के आंकड़ों के अनुसार देश के 12 सरकारी बैंकों की कुल संपत्ति करीब 171 लाख करोड़ रुपये है। यह भारत के पूरे बैंकिंग सेक्टर का लगभग 55 फीसदी हिस्सा है। फिलहाल सरकार के पास इन बैंकों में 51 फीसदी से कहीं ज्यादा हिस्सेदारी है। अगर विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाई जाती है, तो इतनी बड़ी संपत्ति में विदेशी निवेशकों की एंट्री आसान हो जाएगी। यही वजह है कि इस फैसले को लेकर सवाल और बहस दोनों तेज हो गई हैं।
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बजट में बैंकिंग सेक्टर पर बड़ा संकेत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए बैंकिंग सेक्टर को लेकर बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि पूरे बैंकिंग सिस्टम की समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी का काम सुधारों पर आधारित नई ग्रोथ योजना तैयार करना होगा, ताकि भारतीय बैंक आने वाले समय में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप मजबूत बन सकें।
भारतीय बैंक पहले से मजबूत स्थिति में
सरकार का दावा है कि भारतीय बैंक आज पहले से कहीं बेहतर स्थिति में हैं। मुनाफा बढ़ा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच भी मजबूत हुई है। एसेट्स के हिसाब से दुनिया के टॉप 10 बैंकों में भारत के दो बैंक शामिल हैं। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एचडीएफसी बैंक हैं। एसबीआई के पास करीब 0.9 ट्रिलियन डॉलर और एचडीएफसी बैंक के पास करीब 0.5 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति है।
FDI बढ़ी तो फायदा या नुकसान
FDI सीमा बढ़ने से सरकारी बैंकों को पूंजी मिलने में आसानी होगी और टेक्नोलॉजी व मैनेजमेंट में सुधार आ सकता है। लेकिन दूसरी तरफ यह आशंका भी है कि विदेशी दखल बढ़ने से भविष्य में सरकारी बैंकों का चरित्र बदल सकता है। अगर फैसले में जरा सी चूक हुई, तो 171 लाख करोड़ की संपत्ति पर जोखिम भी बढ़ सकता है। अब सबकी नजर सरकार के अंतिम फैसले पर है, जो तय करेगा कि यह कदम बैंकिंग सेक्टर के लिए वरदान बनेगा या खतरे की घंटी।