फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट चरण के मुकाबलों के बीच उत्तर अमेरिका में पड़ रही भीषण हीटवेव ने नई चिंता खड़ी कर दी है। पूर्वी तट पर बने शक्तिशाली हीट डोम के कारण कई शहरों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी और उमस पहले के मुकाबले अधिक खतरनाक हो गई है, जिसका असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन और दर्शकों की सुरक्षा दोनों पर पड़ रहा है।
खुले स्टेडियमों में ज्यादा मुश्किल
न्यूयॉर्क, मियामी, फिलाडेल्फिया और टोरंटो जैसे खुले स्टेडियमों में खेलने वाली टीमों को तेज धूप और अधिक नमी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, ह्यूस्टन, डलास और अटलांटा जैसे एयर-कंडीशंड स्टेडियमों में परिस्थितियां अपेक्षाकृत बेहतर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग मौसम की स्थिति टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धा और निष्पक्षता को भी प्रभावित कर सकती है।
खिलाड़ियों और दर्शकों की सेहत पर असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक तापमान और नमी के कारण शरीर को ठंडा रखना कठिन हो जाता है। लगातार दौड़ने वाले खिलाड़ियों पर इसका असर ज्यादा पड़ता है। वहीं, दर्शकों के लिए भी स्टेडियम तक पहुंचने, लंबी कतारों में खड़े रहने और खुले में इंतजार करने के दौरान गर्मी का खतरा बढ़ जाता है। ग्रुप चरण के दौरान ह्यूस्टन में गर्मी से जुड़ी परेशानी के कारण 100 से अधिक दर्शकों को चिकित्सा सहायता लेनी पड़ी थी।
जलवायु परिवर्तन पर बढ़ी चिंता
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हीटवेव की तीव्रता में जलवायु परिवर्तन की बड़ी भूमिका है। कई मैच ऐसे तापमान में खेले गए, जहां खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर पहले भी चिंता जताई जा चुकी है। टूर्नामेंट के दौरान तेज आंधी और अत्यधिक गर्मी जैसी मौसम संबंधी घटनाओं ने आयोजकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
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सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदम
फीफा और स्थानीय आयोजक खिलाड़ियों व दर्शकों की सुरक्षा के लिए कई उपाय कर रहे हैं। मैचों के दौरान अतिरिक्त वॉटर ब्रेक, पीने के पानी की बेहतर व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर समय में बदलाव जैसे विकल्पों पर काम किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के बड़े खेल आयोजनों में मौसम और जलवायु से जुड़े जोखिमों को योजना का अहम हिस्सा बनाना होगा, ताकि खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।