SIR controversy: संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू होने वाला है और उससे पहले ही दो बड़े मुद्दों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। एक तरफ नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज नई FIR ने कांग्रेस को हमलावर बनाया है, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर निशाना साध रहा है। सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा, लेकिन विपक्ष के विरोध की तीव्रता देखते हुए सरकार के विधायी एजेंडे पर व्यवधान का खतरा मंडरा रहा है।
गांधी परिवार पर FIR से बढ़ा तनाव
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज FIR में आरोप है कि 2,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को यंग इंडियन कंपनी के माध्यम से अनुचित तरीके से हासिल किया गया। कांग्रेस का कहना है कि FIR “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” है और पार्टी इसे संसद के भीतर बड़े मुद्दे के रूप में उठाएगी। FIR में प्रशासनिक स्तर पर फर्जी कागजात और हेराफेरी के आरोप भी शामिल किए गए हैं, जिसके चलते विवाद और गहराया है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार संवेदनशील मामलों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है।
SIR पर विपक्ष एकजुट
पश्चिम बंगाल में TMC, तमिलनाडु में DMK और उत्तर प्रदेश में SP—तीनों ने SIR प्रक्रिया पर खुलकर नाराजगी जताई है। टीएमसी का दावा है कि मतदाता सूची में बदलाव के नाम पर SIR का उपयोग राजनीतिक फायदे उठाने और बूथ संख्या बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। DMK ने आगामी तमिलनाडु चुनाव से पहले इसे “चुनावी हस्तक्षेप” बताया है, जबकि समाजवादी पार्टी कथित अनियमितताओं को संसद में जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है। CPI(M) और कांग्रेस ने भी SIR को अराजक प्रक्रिया बताया है, जिसमें बूथ स्तर अधिकारियों पर असामान्य दबाव पड़ रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि SIR पूरी तरह चुनाव आयोग की नियमित और न्यायालय द्वारा निर्देशित प्रक्रिया है, जिस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।