
First hydrogen car: ऑटोमोबाइल सेक्टर में नई तकनीक का बड़ा कदम उठाते हुए ऑस्ट्रेलिया में पहली हाइड्रोजन कार बाजार में आ गई है। यह कार महज 5 मिनट में चार्ज हो जाती है, जिसमें चार्जिंग स्टेशन पर अंदर जाना और बाहर आना भी शामिल है। पूरी तरह टैंक फुल होने पर यह वाहन 900 किलोमीटर की यात्रा करता है। खास बात यह है कि चलते समय यह कार प्रदूषण नहीं फैलाती बल्कि हवा को शुद्ध करती है, जो इसे पारंपरिक वाहनों से अलग बनाती है।
हुंडई नेक्सो का अनोखा रिकॉर्ड
इस दिशा में हुंडई नेक्सो ने सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। यह कार 6.27 किलोग्राम हाइड्रोजन चार्ज पर 449,100 लीटर हवा को शुद्ध करती है, जो लगभग 33 लोगों के पूरे दिन की सांस लेने की जरूरत के बराबर है। इसके एग्जॉस्ट पाइप से सिर्फ पानी निकलता है और यह बिल्कुल भी CO2 या अन्य प्रदूषणकारी गैसें उत्सर्जित नहीं करती। तुलना करें तो एक पारंपरिक इंजन वाली कार इतनी दूरी पर लगभग 126 किलोग्राम CO2 हवा में छोड़ती। इस वजह से हाइड्रोजन तकनीक को ऑटोमोबाइल सेक्टर में भविष्य का टिकाऊ विकल्प माना जा रहा है।
यह भी पढ़ेंःLadli Behna Yojana: लाडली बहनों को घर बैठे 5000 रुपये कमाने का मौका, जानें कैसे मिलेगा फायदा
भारत के लिए बड़ा मौका
हाइड्रोजन इंजन की बढ़ती मांग से भारत को भी बड़ा फायदा हो सकता है। दुनिया भर में स्थायी परिवहन की ओर बढ़ते रुझान के बीच भारत सबसे कम लागत पर हाइड्रोजन उत्पादन और आपूर्ति करने की क्षमता रखता है। अगर ऑटोमोबाइल कंपनियां इस दिशा में निवेश बढ़ाती हैं तो भारत न केवल अपने घरेलू बाजार को मजबूत करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी का बड़ा हब बन सकता है। इस पहल से रोजगार, उद्योग और अर्थव्यवस्था तीनों को मजबूती मिलने की संभावना है।