Flying Car History: एलन मस्क की कंपनी टेस्ला के नए रोडस्टर को लेकर इन दिनों खूब चर्चा हो रही है। कंपनी टेस्ला ने हाल ही में नए रोडस्टर का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसमें कार ने जमीन से ऊपर उठकर हवा में स्टंट किए। हालांकि कंपनी ने अभी तक यह आधिकारिक रूप से नहीं कहा है कि यह कार इतने समय तक वास्तव में हवा में उड़ सकती है। टेस्ला के इस नए प्रोजेक्ट ने एक बार फिर लोगों को उस पुरानी और रोमांचक कल्पना की याद दिला दी जिसमें कारें सड़क पर चलने के साथ आसमान में भी उड़ सकें। कंपनी के अनुसार इस नए रोडस्टर का उत्पादन 2028 तक शुरू हो सकता है।
हवा में उड़ने वाली गाड़ी का यह सपना आज का नहीं है, बल्कि 100 सालों से भी ज्यादा पुराना है। कई इंजीनियरों और कंपनियों ने ऐसी मशीन बनाने की कोशिश की, जो जरूरत पड़ने पर कार और विमान दोनों का काम कर सके। आइए जानते हैं इतिहास के उन प्रमुख प्रयासों के बारे में जब इंजीनियरों ने उड़ने वाली कार बनाने की कोशिश की थी।
पहला बड़ा प्रयोग साल 1917
अमेरिकी विमान निर्माता ग्लेन कर्टिस ने 1917 में कर्टिस ऑटोप्लेन बनाया था। इसमें चार पहियों वाला कार जैसा ढांचा था और इसके पंखों को हटाया भी जा सकता था। इस वाहन ने कुछ छोटी छलांगें जरूर लगाई, लेकिन यह पूरी तरह सफल उड़ान नहीं भर सका। प्रथम विश्व युद्ध शुरू होने के कारण इस प्रोजेक्ट को रोकना पड़ था। इसके बाद 1937 में एरोबाइल आया। यह कर्टिस के मुकाबले ज्यादा सफल रहा और इसने उड़ान भी भरी, लेकिन बाजार में ग्राहकों की कमी के कारण यह बिन नहीं पाया।
साल 1950 में Taylor Aerocar ने भी की थी कोशिश
1950 के दशक में टेलर एयरोकार ने इस उम्मीद को फिर से जिंदा किया। साल 1956 में इसे अमेरिकी सरकार से अनुमित भी मिल गई थी। इस कार को सड़क पर चलाया जा सकता था और उड़ान भरने के लिए इसके पंख जोड़े जाते थे। सरकारी अनुमित मिलने के बावजूद इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं हो सका। इसमें समस्या यह थी कि तकनीक तो ठीक थी, लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल में सुरक्षा और व्यावहारिकता से जुड़ी कई चुनौतियां थीं।
यह भी पढ़ें: 29kmpl का माइलेज और दमदार लुक! Renault Duster Hybrid भारत में हुई लॉन्च: कीमत कर देगी हैरान
हादसे का शिकार हुआ प्रोजेक्ट
1970 के दशक में हेनरी स्मोलिंस्की ने एवी मिजार नाम की एक अजीब मशीन बनाई। इसमें फोर्ड पिंटो कार को सेस्ना विमान के पंखों और इंजन से जोड़ा गया था। लेकिन 1973 में परीक्षण उड़ान के दौरान यह वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया और स्मोलिंस्की की मौत हो गई। इसके बाद पॉल मोलेर ने स्काईकार के जरि वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग वाली कार का सपना देखा। दशकों तक इस पर काम हुआ, लेकिन यह भी आम लोगों के उपयोग के लिए बाजार में नहीं आ सकी।