वैश्विक तनाव के बीच अब महंगाई का असर रोजमर्रा की चीजों पर दिखने लगा है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार को अस्थिर कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में साबुन, शैम्पू, बिस्किट और खाने का तेल महंगा हो सकता है। फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स यानी एफएमसीजी सेक्टर की कंपनियां अब कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतें बनी बड़ी वजह
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी के कारण कंपनियों की लागत बढ़ रही है। यही वजह है कि कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों को बनाए रखना मुश्किल हो गया है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कीमतें कम से कम 3 से 4 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।
स्टॉक खत्म होते ही दिखेगा असर
फिलहाल कंपनियों के पास 30 से 45 दिनों का कच्चा माल और तैयार स्टॉक मौजूद है, इसलिए तुरंत असर सीमित रह सकता है। लेकिन जैसे-जैसे यह स्टॉक खत्म होगा, कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में बाजार में महंगाई का असर साफ नजर आएगा।
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पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट भी हुआ महंगा
एफएमसीजी उत्पादों की पैकेजिंग में प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है, जो कच्चे तेल से बनता है। जब तेल महंगा होता है तो पैकेजिंग की लागत भी बढ़ जाती है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर खर्च भी बढ़ रहा है। कंटेनर किराया, जहाजों का बीमा और ईंधन की कीमतें बढ़ने से कंपनियों का खर्च बढ़ गया है, जिसका असर अब ग्राहकों पर डाला जाएगा।
खाने के तेल पर भी पड़ेगा असर
भारत बड़ी मात्रा में खाद्य तेल आयात करता है, जो समुद्री मार्ग से आता है। अगर वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होती है या शिपिंग महंगी होती है, तो इसका सीधा असर खाने के तेल की कीमतों पर पड़ेगा। यानी रसोई का बजट भी बढ़ सकता है।
आम आदमी के लिए चुनौती बढ़ेगी
अगर कीमतें बढ़ती हैं तो रोजमर्रा की जरूरत की चीजें महंगी हो जाएंगी, जिससे घर का बजट बिगड़ सकता है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा। कुल मिलाकर, अगर वैश्विक हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है और लोगों की मुश्किलें