भारत और संयुक्त अरब अमीरात के रिश्तों ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान खींचा है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा भले ही तीन घंटे से कुछ ज्यादा रही, लेकिन इसके असर दूर तक जाते दिख रहे हैं। इस छोटी लेकिन अहम यात्रा में भारत और यूएई ने एक दर्जन से ज्यादा बड़े फैसलों की घोषणा की। इन फैसलों ने साफ कर दिया कि दोनों देश सिर्फ दोस्त नहीं, बल्कि लंबी रणनीतिक साझेदारी की दिशा में तेज कदम बढ़ा रहे हैं।
2032 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
भारत और यूएई ने तय किया है कि दोनों देशों के बीच व्यापार को 2032 तक दोगुना कर 200 अरब डॉलर से ज्यादा किया जाएगा। अभी दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए छोटे और मध्यम कारोबारियों को जोड़ने, नए डिजिटल व्यापार रास्ते बनाने और भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने पर खास ध्यान दिया जाएगा। इससे दोनों देशों की कंपनियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा और परमाणु सहयोग पर बड़ा फैसला
ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने अहम कदम उठाए हैं। यूएई की सरकारी तेल कंपनी से भारत को लंबे समय तक गैस सप्लाई का समझौता किया गया है। इसके साथ ही बड़े परमाणु रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित करने और लगाने पर भी सहमति बनी है। यह साझेदारी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और यूएई को भरोसेमंद साझेदार बनाए रखेगी।
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गुजरात और गिफ्ट सिटी में निवेश बढ़ेगा
इस यात्रा में गुजरात के धोलेरा क्षेत्र और गिफ्ट सिटी को लेकर भी बड़े ऐलान हुए। यूएई की बड़ी कंपनियां भारत के वित्तीय केंद्र गिफ्ट सिटी में अपने दफ्तर खोलेंगी। धोलेरा में हवाई अड्डा, ट्रेनिंग सेंटर, रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा ढांचे के विकास में यूएई निवेश करेगा। इससे रोजगार के नए अवसर बनेंगे और भारत का औद्योगिक आधार मजबूत होगा।
डिजिटल और रक्षा सहयोग भी मजबूत
भारत और यूएई ने अंतरिक्ष, रक्षा, डिजिटल डेटा और सुपरकंप्यूटिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। भारत में एक बड़ा सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर लगाने में यूएई की कंपनी मदद करेगी। इसके अलावा डिजिटल डेटा एंबेसी और अबू धाबी में हाउस ऑफ इंडिया जैसे प्रस्तावों पर भी सहमति बनी है, जो दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देंगे।
एशिया की राजनीति पर पड़ेगा असर
भारत और यूएई की इस तेजी से बढ़ती नजदीकी का असर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। जानकार मानते हैं कि इस साझेदारी से एशिया की राजनीति में नए संतुलन बन सकते हैं। चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह संकेत है कि भारत अब सिर्फ एक क्षेत्रीय ताकत नहीं, बल्कि मजबूत वैश्विक साझेदारियों के साथ आगे बढ़ रहा है। तीन घंटे की यह मुलाकात भारत की कूटनीति में एक बड़ी जीत के तौर पर देखी जा रही है।