दुनिया की राजनीति और व्यापार इन दिनों शतरंज की बिसात पर चल रहे हैं, जहां एक चाल से कई मोर्चों पर असर दिख रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर लगाए गए टैरिफ ने यूरोप और अमेरिका को आमने सामने ला खड़ा किया है। इसी टकराव के बीच भारत के लिए एक नया मौका बनता दिख रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब बड़े खिलाड़ी आपस में उलझते हैं, तब तीसरे देश के लिए रास्ते खुलते हैं और फिलहाल यही स्थिति भारत के पक्ष में जाती नजर आ रही है।
यूरोप और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव
ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों के विरोध के बाद अमेरिका ने कई यूरोपीय देशों से आने वाले उत्पादों पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। जनवरी से लागू होने वाले इस फैसले को जून तक और सख्त किया जाना है। इससे यूरोपीय संघ के भीतर नाराजगी बढ़ गई है। यूरोप को अब यह एहसास हो गया है कि अमेरिका के साथ की गई ट्रेड डील भी भविष्य में सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। इसी वजह से यूरोपीय संघ वैकल्पिक व्यापारिक साझेदारों की ओर तेजी से देख रहा है।
भारत के साथ डील की रफ्तार तेज
यूरोपीय संघ और भारत के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका के आक्रामक रुख के बाद यूरोप के लिए भारत और भी अहम साझेदार बन गया है। भारत एक बड़ा बाजार भी है और स्थिर व्यापारिक सहयोगी भी। ऐसे में दोनों पक्ष चाहते हैं कि इस समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जाए ताकि आपसी व्यापार को नई दिशा मिल सके।
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जनवरी में हो सकता है बड़ा ऐलान
खबर है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच चल रही बातचीत को इसी महीने औपचारिक रूप से पूरा करने की घोषणा हो सकती है। राजधानी में होने वाले शिखर सम्मेलन के दौरान इस डील पर मुहर लगने की उम्मीद है। यूरोपीय नेतृत्व की भारत यात्रा और गणतंत्र दिवस समारोह में उनकी मौजूदगी को भी इसी बड़े समझौते से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं।
भारतीय निर्यातकों के लिए सुनहरा मौका
अगर यह समझौता होता है तो भारतीय निर्यातकों को यूरोप के 27 देशों के बड़े बाजार तक आसान पहुंच मिल सकती है। कपड़ा, दवा, ऑटो पार्ट्स और आईटी जैसे सेक्टर को इसका सीधा फायदा होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका और यूरोप के बीच चल रहा टैरिफ तनाव भारत के लिए निर्यात बढ़ाने का बड़ा अवसर बन सकता है, जैसा पहले चीन-अमेरिका व्यापार विवाद के दौरान देखा गया था।
अमेरिका से नुकसान की भरपाई संभव
अमेरिका के साथ ट्रेड डील में देरी और टैरिफ के खतरे के बीच भारत पहले ही मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों से समझौते कर चुका है। अब यूरोप के साथ मजबूत डील होने से भारत अमेरिकी बाजार में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई कर सकता है। कुल मिलाकर ग्रीनलैंड टैरिफ ने वैश्विक समीकरण बदल दिए हैं और इस बदली हवा में भारत और यूरोप की नजदीकी एक नई कहानी लिखने को तैयार दिख रही है।