भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शराब बनाने वाली कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। नियामक ने व्हिस्की, रम, वोदका, बीयर और अन्य मादक पेय बनाने वाली कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। एजेंसी का कहना है कि जांच में कुछ कंपनियों द्वारा नियमों के विपरीत फ्लेवर के इस्तेमाल और उत्पाद की उम्र को लेकर भ्रामक दावे करने के मामले सामने आए हैं। कंपनियों से जवाब मांगा गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
फ्लेवर को लेकर उठे सवाल
जांच के दौरान FSSAI को पता चला कि कुछ कंपनियां अपने उत्पादों में ऐसे सिंथेटिक फ्लेवर मिला रही थीं, जिनकी अनुमति नहीं है। इन फ्लेवर का इस्तेमाल प्राकृतिक स्वाद और खुशबू जैसा अनुभव देने के लिए किया जा रहा था। नियामक का मानना है कि इससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता के बारे में गलत जानकारी मिल सकती है। इसलिए इसे खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना गया है।
'8 साल' और '12 साल' जैसे दावों पर आपत्ति
FSSAI ने शराब की बोतलों पर लिखे जाने वाले 'एज्ड', '8 साल पुरानी' और '12 साल पुरानी' जैसे दावों पर भी सवाल उठाए हैं। नियमानुसार यदि किसी उत्पाद की उम्र का दावा किया जाता है, तो वह मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में थोड़ी मात्रा में पुरानी स्पिरिट मिलाकर पूरे उत्पाद को ज्यादा पुराना बताने का दावा किया जा रहा था।
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कंपनियों को सुधार का मौका
नियामक ने संबंधित कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने जवाब के साथ जरूरत पड़ने पर उत्पादों की लेबलिंग में सुधार करें या संबंधित बैच बाजार से वापस लें। FSSAI ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी जानकारी देना हर कंपनी की जिम्मेदारी है। इसलिए नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो होगी कार्रवाई
FSSAI ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनियों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें मुकदमा दर्ज होने के साथ भारी जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। एजेंसी का कहना है कि खाद्य और पेय पदार्थों की गुणवत्ता तथा सही जानकारी सुनिश्चित करने के लिए नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।