मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए को लेकर किसान संगठनों की नाराजगी और आंदोलन की चेतावनी के बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एनडीए की बैठक में सरकार का पक्ष रखा। गोयल ने प्रस्तुति के जरिए बताया कि मोदी सरकार के दौरान किए गए व्यापार समझौतों से अलग-अलग राज्यों और उद्योगों को किस तरह फायदा मिल सकता है। उन्होंने एनडीए सांसदों से कहा कि वे अपने संसदीय क्षेत्रों में जाकर लोगों को इन समझौतों के फायदे समझाएं। पंजाब के कुछ किसान संगठनों की ओर से एफटीए के विरोध में दिल्ली कूच की चेतावनी के बाद सरकार की यह पहल अहम मानी जा रही है।
किसानों को लेकर गोयल ने दूर की आशंका
पीयूष गोयल ने बैठक में किसानों से जुड़ी चिंताओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी, अनाज, मसाले और कई दूसरे कृषि उत्पादों को एफटीए के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का कहना है कि ऐसे समझौतों का उद्देश्य भारतीय किसानों या घरेलू उत्पादकों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि भारतीय उत्पादों के लिए विदेशों में बड़ा बाजार तैयार करना है। गोयल ने पिछली यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उस दौर में छोटे देशों के साथ समझौते करते समय सभी हितधारकों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई थी।
एफटीए से रोजगार और कारोबार बढ़ने का दावा
गोयल ने बताया कि मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय कंपनियों को विदेशी बाजारों में अपने सामान और सेवाएं बेचने के ज्यादा अवसर मिलेंगे। आयात-निर्यात शुल्क और दूसरी व्यापारिक बाधाएं कम होने से भारतीय निर्यातकों को फायदा हो सकता है। सरकार का दावा है कि इससे विदेशी निवेश बढ़ेगा, भारतीय उद्योगों को दुनिया की बड़ी आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ने का मौका मिलेगा और नई तकनीक तक पहुंच आसान होगी। निर्यात और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से रोजगार और लोगों की आय में बढ़ोतरी होने की भी उम्मीद जताई गई है।
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हर जिले तक फायदे पहुंचाने की तैयारी
सरकार अब एफटीए का फायदा केवल बड़े औद्योगिक शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती। गोयल के मुताबिक केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, अलग-अलग मंत्रालयों और विदेशों में भारतीय मिशनों के बीच तालमेल बढ़ाया जा रहा है। डिजिटल पोर्टल और जिलों में जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए कारोबारियों और निर्यातकों तक जानकारी पहुंचाने की तैयारी है। इसके अलावा निर्यात बढ़ाने के लिए विशेष मिशन, विदेशी बाजारों में भारतीय ब्रांडों का प्रचार, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियां और जरूरी पंजीकरण में कारोबारियों की मदद करने की योजना भी है। वाणिज्य भवन में इसके लिए एक विशेष प्रकोष्ठ भी बनाया गया है।
यूपी-बिहार से महाराष्ट्र-गुजरात तक फायदे का दावा
सरकार ने राज्यों के हिसाब से भी एफटीए के संभावित फायदे गिनाए हैं। दिल्ली-एनसीआर में कपड़ा, आभूषण, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स, महाराष्ट्र में कपड़ा, दवा, वाहन और आभूषण जबकि गुजरात में कपड़ा, रसायन, दवा और समुद्री उत्पादों को फायदा मिलने की बात कही गई है। कर्नाटक और तेलंगाना में सूचना तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवा उद्योग पर जोर है। बिहार में कृषि उत्पाद, पेट्रोलियम, कपड़ा, चमड़ा और दवा जबकि झारखंड में खनिज, धातु और वाहन पुर्जों से जुड़े कारोबार को अवसर मिलने का दावा किया गया है। पश्चिम बंगाल में चाय, समुद्री उत्पाद और हस्तशिल्प जबकि उत्तराखंड में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और आयुष जैसे क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद जताई गई है।
किसान आंदोलन से पहले संदेश पहुंचाने की कोशिश
इस पूरी कवायद का समय राजनीतिक रूप से भी अहम है। किसान संगठनों के एक हिस्से ने एफटीए को लेकर सवाल उठाए हैं और दिल्ली कूच की चेतावनी भी दी है। ऐसे में सरकार की कोशिश सांसदों के जरिए अपना पक्ष सीधे जनता तक पहुंचाने की दिखाई दे रही है। पीयूष गोयल का कहना है कि एफटीए भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत करने के लिए जरूरी हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों को इनका फायदा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य इन व्यापार समझौतों को 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने की रणनीति का अहम हिस्सा बनाने का है। अब देखना होगा कि सरकार की इन दलीलों के बाद किसान संगठनों की चिंताएं कितनी दूर होती हैं और प्रस्तावित आंदोलन को लेकर उनका अगला कदम क्या रहता है।