पिछले 15 दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। कई शहरों में पेट्रोल 100 से 110 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है, जबकि डीजल भी लगातार महंगा हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते 10 से 12 दिनों के भीतर 4 बार दाम बढ़ाए गए हैं। इसका असर सिर्फ वाहन चालकों पर नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट, सब्जियों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है।
पाकिस्तान में पहले झटका फिर राहत
पाकिस्तान में हालात कुछ अलग रहे। वहां पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिली और दाम 320 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गए। लेकिन घरेलू महंगाई और जनता के दबाव के बाद सरकार ने बाद में थोड़ी राहत भी दी। हालांकि कटौती के बावजूद पाकिस्तान में ईंधन अभी भी काफी महंगा बना हुआ है और आम लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।
नेपाल और बांग्लादेश में भी असर
नेपाल में तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी हुई है। वहां भारत पर आयात निर्भरता ज्यादा होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर सीधे देखने को मिलता है। बढ़ती कीमतों से ट्रांसपोर्ट और जरूरी सामानों की लागत बढ़ी है। वहीं बांग्लादेश में पिछले 15 दिनों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन वहां पहले से ही ईंधन महंगा चल रहा है। सीमित सब्सिडी की वजह से आम लोगों पर बोझ बना हुआ है।
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श्रीलंका और चीन की स्थिति अलग
आर्थिक संकट से गुजर चुके श्रीलंका में फिलहाल तेल बाजार थोड़ा स्थिर दिखाई दे रहा है। IMF सपोर्ट के बाद सरकार कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, हालांकि दाम अभी भी सामान्य स्तर से ऊपर बने हुए हैं। दूसरी ओर चीन में सरकार तेल की कीमतों पर सख्त नियंत्रण रखती है। वहां सब्सिडी और सरकारी नियंत्रण की वजह से आम लोगों पर अचानक बोझ नहीं पड़ता और बड़े उतार-चढ़ाव भी कम देखने को मिलते हैं।
भारत में बढ़ोतरी सबसे ज्यादा क्यों?
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में पेट्रोल-डीजल की तेज बढ़ोतरी के पीछे कई वजहें हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये की कमजोरी, टैक्स स्ट्रक्चर और ऑयल कंपनियों की लागत एडजस्टमेंट शामिल हैं। वहीं पड़ोसी देशों में सरकारें कभी राहत देती हैं तो कभी अचानक कीमतें बढ़ा देती हैं। पिछले 15 दिनों का ट्रेंड साफ दिखाता है कि दक्षिण एशिया में तेल की कीमतें अब पूरी तरह वैश्विक बाजार और राजनीतिक हालात पर निर्भर हो चुकी हैं।