फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण कार्य सत्र में हिस्सा लिया। यह सत्र “संतुलित, समावेशी और सतत आर्थिक विकास” विषय पर केंद्रित था। सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल हुए, जहां वैश्विक चुनौतियों और आर्थिक विकास पर चर्चा की गई। पीएम मोदी की मौजूदगी ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को मजबूत किया।
कई बड़े नेताओं से की मुलाकात
कार्य सत्र से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कई प्रमुख वैश्विक नेताओं से द्विपक्षीय बातचीत की। उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टालिना जियोरगीवा से मुलाकात की। इन बैठकों में आपसी सहयोग, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।
पश्चिम एशिया में शांति का किया स्वागत
जी7 आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चल रहे संघर्षों ने कई देशों को प्रभावित किया है और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। पीएम मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में स्थिरता और शांति पूरे विश्व के लिए जरूरी है।
होर्मुज संकट पर जताई चिंता
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में होर्मुज जलडमरूमध्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में व्यापार प्रभावित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि इस संघर्ष में कई भारतीय नागरिकों की भी जान गई है। पीएम मोदी ने सभी देशों से समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की और इसे वैश्विक जिम्मेदारी बताया।
संवाद और कूटनीति ही समाधान
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी तनाव और संघर्ष का स्थायी समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध और टकराव किसी समस्या का अंतिम समाधान नहीं होते। देशों को सहयोग, संवाद और आपसी समझ बढ़ाकर आगे बढ़ना चाहिए ताकि वैश्विक शांति कायम रह सके।
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भरोसे की कमी सबसे बड़ी चुनौती
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि विश्वास की कमी से जूझ रही है। उन्होंने चिंता जताई कि व्यापार और तकनीक का गलत इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसे को कमजोर कर रहा है। पीएम मोदी ने भारत की प्राचीन सोच ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत हमेशा “मानवता पहले” के सिद्धांत पर चलता है। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक है, जब वह आम लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं से जुड़ा हो। जी7 में उनका यह संदेश वैश्विक सहयोग और शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।