उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े कॉरिडोर गंगा एक्सप्रेसवे पर कार के लिए करीब 1500 रुपये टोल की चर्चा है। यह आंकड़ा सुनकर भले ही चौंक लगे, लेकिन इसकी वजह इसकी लागत और हाईटेक सुविधाएं हैं। 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को बनाने में करीब 36,230 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जो इसे राज्य का सबसे महंगा प्रोजेक्ट बनाता है। मेरठ से प्रयागराज तक यह कॉरिडोर अब यात्रा को तेज और आसान बनाएगा।
अन्य एक्सप्रेसवे से तुलना
अगर अन्य एक्सप्रेसवे से तुलना करें तो यह लागत के मामले में काफी आगे है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे भी बड़े प्रोजेक्ट रहे हैं, लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे का स्केल और निवेश दोनों ही ज्यादा हैं। यही कारण है कि इसकी टोल दर भी ज्यादा रखी गई है, ताकि लागत की भरपाई और रखरखाव बेहतर तरीके से हो सके।
हाईटेक निगरानी सिस्टम
इस एक्सप्रेसवे की सबसे खास बात इसकी अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था है। हर किलोमीटर पर कैमरे लगाए गए हैं, जो रात में भी एक किलोमीटर तक साफ नजर रख सकते हैं। मेरठ के कंट्रोल रूम से पूरे रूट की निगरानी होगी। अगर कोई वाहन गलत दिशा में चलता है या ज्यादा देर तक रुका रहता है, तो तुरंत अलर्ट जारी किया जाएगा और अनाउंसमेंट के जरिए चेतावनी दी जाएगी।
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ड्राइवर से सीधे संवाद की सुविधा
यह पहला एक्सप्रेसवे होगा जहां हाईटेक स्पीकर्स के जरिए वाहन मालिक से सीधे बात की जा सकेगी। अगर कोई गाड़ी 25 मिनट से ज्यादा खड़ी रहती है, तो सिस्टम खुद ड्राइवर से पूछेगा। इसके अलावा स्पीड मॉनिटरिंग, नंबर प्लेट पहचान और ट्रैफिक कंट्रोल जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल हैं, जिससे सुरक्षा और बेहतर होगी।
सुरक्षा और आराम का नया अनुभव
ड्राइविंग के दौरान नींद से बचाने के लिए सड़क किनारे थर्मो प्लास्टिक हर्डल लगाए गए हैं, जिससे वाइब्रेशन के जरिए ड्राइवर को सतर्क किया जाएगा। इसके अलावा 24 घंटे पेट्रोलिंग, एम्बुलेंस और इमरजेंसी सेवाएं भी मौजूद रहेंगी। साफ है कि यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क नहीं बल्कि एक हाईटेक अनुभव है, जो यात्रियों को सुरक्षा और सुविधा दोनों देता है।