
भारत और अमेरिका के रिश्तों में नरमी के संकेत अब रक्षा क्षेत्र में भी नजर आने लगे हैं। अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तीसरा एविएशन इंजन (F-404) की डिलीवरी कर दी है। माना जा रहा है कि चौथा इंजन भी इसी महीने के आखिर तक भारत पहुंच जाएगा। इन इंजनों का इस्तेमाल स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA तेजस मार्क-1ए के लिए होना है।
दो साल से अटकी सप्लाई, अब मिली रफ्तार
अमेरिका से इंजन सप्लाई करीब दो साल से सुस्त थी। पिछले महीने (अगस्त) में तो एक भी इंजन भारत नहीं पहुंचा। इस दौरान भारत-अमेरिका रिश्तों में खटास गहराई थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार सकारात्मक बयानों के बाद हालात बदलने लगे। डील के मुताबिक 2025-26 तक GE को कुल 99 इंजनों में से 12 इंजन HAL को देने हैं।
HAL के पास तैयार 10 तेजस मार्क-1ए
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने LCA मार्क-1ए के 10 विमान तैयार कर लिए हैं। लेकिन इंजन की कमी से प्रोजेक्ट अटका पड़ा है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह भी इस देरी पर नाराजगी जता चुके हैं। सितंबर में तेजस का बड़ा फायरिंग टेस्ट होना है जिसमें यह विमान स्वदेशी अस्त्र मिसाइल और शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल दागेगा। इसके बाद दो विमान वायुसेना को सौंपने की योजना है।
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करार और देरी का विवाद
2021 में रक्षा मंत्रालय ने 48 हजार करोड़ रुपये में HAL से 83 LCA मार्क-1ए खरीदने का करार किया था। इसके लिए भारत ने अमेरिका से 99 F-404 इंजन मंगवाने का समझौता किया। लेकिन अब तक मुश्किल से 2-3 ही इंजन मिल पाए हैं। अमेरिका का तर्क है कि वैश्विक सप्लाई चेन बाधित है, जबकि भारत मानता है कि खालिस्तानी आतंकी पन्नू प्रकरण, टैरिफ वॉर और ऑपरेशन सिंदूर विवाद के चलते सप्लाई पर असर पड़ा है।
PMO की सख्त नजर
जुलाई में प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रिंसिपल सेक्रेटरी पी.के. मिश्रा ने खुद HAL की बेंगलुरु फैक्ट्री जाकर तेजस प्रोजेक्ट की समीक्षा की थी। सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक कम से कम 10 तेजस मार्क-1ए वायुसेना को सौंप दिए जाएं। इसके साथ ही पिछले महीने वायुसेना के लिए 97 अतिरिक्त स्वदेशी लड़ाकू विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी गई है।
भारत का भरोसा साफ है कि इंजन भले देर से आएं, लेकिन तेजस का सफर नहीं रुकेगा।