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Nepal Gen Z Protest: नेपाल इस समय बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंधों के खिलाफ शुरू हुआ युवाओं का आंदोलन देखते ही देखते हिंसक हो गया। राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और नेताओं के घरों पर आगजनी की घटनाएं हुईं। हालात इतने बिगड़े कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और कई मंत्री देश छोड़कर बाहर चले गए। हालात काबू में लाने के लिए सेना को सड़कों पर उतारा गया है और शांति बहाली की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
अंतरिम सरकार की तलाश, कुलमन घीसिंग सबसे आगे
इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच नेपाल में नई सरकार के नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज है। पहले आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवाओं ने पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का नाम आगे बढ़ाया था, लेकिन अंदरूनी विरोध के कारण यह प्रस्ताव टिक नहीं पाया। अब प्रसिद्ध इंजीनियर और नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख कुलमन घीसिंग अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। आंदोलन में सुदन गुरुंग, काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह और रबि लमिछाने जैसे चेहरों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है।
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भारत पर नजर, आर्थिक स्थिति पर सवाल
नेपाल के हालात पर भारत में भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आरएलडी नेता मलूक नागर ने कहा कि नेपाल भारत और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व से काफी प्रभावित है और जल्द ही स्थिति सामान्य होगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी देश के स्थिर रहने के लिए उसकी आर्थिक स्थिति सबसे अहम होती है। सवाल उठ रहे हैं कि सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध क्यों लगाया और युवाओं को भड़काने के पीछे कौन जिम्मेदार है। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेश और वैश्विक प्रतिष्ठा ही नेपाल के भविष्य की दिशा तय करेंगे।