MBBS Admission 2026 Seats: नीट 2026 री-एग्जाम अब खत्म हो चुका है। अब परीक्षा में शामिल हुए लाखों उम्मीदवारों की नजरें रिजल्ट और काउंसलिंग प्रक्रिया पर टिकी हैं। डॉक्टर बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए इस साल मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा होने वाला है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और NTA के आंकड़े बताते हैं कि इस बार सीटों के लिए मारामारी पिछले सालों से कहीं अधिक है।
20 लाख से ज्यादा छात्र हुए शामिल
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अनुसार, इस साल NEET-UG के लिए 22.79 लाख से ज्यादा छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें लगभग 13.33 लाख छात्राएं और 9.47 लाख छात्र शामिल हैं। लेकिन 21 जून 2026 को आयोजित हुए री-एग्जाम में 20 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स शामिल हुए।
देश में MBBS की 1.29 लाख सीटें उपलब्ध
NMC के डेटा के मुताबिक, देश में MBBS की 1.29 लाख सीटें उपलब्ध हैं। इसका मतलब यह है कि औसतन हर 18 छात्रों में से केवल 1 छात्र को ही MBBS की सीट मिल पाएगी। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध PDF के अनुसार, भारत में अभी कुल 823 मेडिकल कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में कुल मिलाकर 1,29,603 MBBS सीटें हैं। इनमें से 450 सरकारी मेडिकल कॉलेज 63,160 सीटें देते हैं और 373 प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल कॉलेज 66,443 सीटें देते हैं। भले ही प्राइवेट कॉलेजों में सरकारी के मुकाबले थोड़ी सीटें ज्यादा हैं, लेकिन छात्रों की पहली पसंद सरकारी मेडिकल कॉलेज ही होते हैं।
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सरकारी सीटों की प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखें
विजनरी मास्टर्ज के डायरेक्टर हरप्रीत सिंह का कहना है कि NMC के सीट मैट्रिक्स और नीट रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स को देखा जाए तो लगभग हर 18 छात्रों में से केवल 1 को MBBS सीट मिलने का अनुमान है।
प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन काफी हद तक नीट क्वालिफाइंग मार्क्स पर निर्भर करता है, लेकिन असली रेस सरकारी कॉलेजों की सीटों के लिए है। यहां मुकाबला इतना कड़ा है कि महज एक अंक का अंतर भी आपकी रैंक को हजारों रैंक पीछे धकेल सकता है। इसलिए छात्रों को सिर्फ कुल सीटें नहीं, बल्कि सरकारी सीटों की प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखना चाहिए।"
रिजल्ट का है इंतजार
उम्मीदवारों की संख्या और उपलब्ध सीटों के बीच का यह बड़ा अंतर बताता है कि छात्रों के लिए अपनी पसंद के कॉलेज में एडमिशन पाने के लिए NEET 2026 में अच्छे मार्क्स लाना जरूरी है। वहीं, अब छात्र बेसब्री से आंसर-की और फाइनल रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद देश के 823 मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होगी।