केंद्र सरकार ने देशभर के गिग वर्कर्स के लिए एक बड़ी पहल की तैयारी कर ली है। Zomato, Swiggy, Flipkart, Amazon, Ola और Uber जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी पार्टनर और कैब ड्राइवरों को अब सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की योजना बनाई गई है। सरकार ने सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनका मकसद अस्थायी और ऐप आधारित कामगारों को भी भविष्य की सुरक्षा देना है।
90 दिन काम करने की अहम शर्त
नए मसौदा नियमों के मुताबिक अगर कोई गिग वर्कर साल में कम से कम 90 दिन किसी एक कंपनी या ऐप के साथ काम करता है, तो वह सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का हकदार होगा। अगर कोई व्यक्ति एक से ज्यादा ऐप पर काम करता है, तो कुल 120 दिन काम करना जरूरी होगा। सरकार ने साफ किया है कि किसी दिन कम कमाई होने से फर्क नहीं पड़ेगा। अगर उस दिन एक भी डिलीवरी या एक भी कैब राइड पूरी हुई है, तो वह पूरा कार्यदिवस माना जाएगा।
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काम के दिन गिनने का नया तरीका
ड्राफ्ट नियमों में गिग वर्कर्स के लिए काम की गणना को आसान बनाया गया है। अगर कोई डिलीवरी बॉय या ड्राइवर एक दिन में तीन अलग-अलग ऐप पर काम करता है, तो उसे तीन दिन का काम माना जाएगा। यानी जितने प्लेटफॉर्म उतने कार्यदिवस। इसका सीधा फायदा यह होगा कि गिग वर्कर्स जल्दी तय सीमा पूरी कर पाएंगे और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के पात्र बन सकेंगे। इससे हेल्थ, बीमा और भविष्य से जुड़ी योजनाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।
रजिस्ट्रेशन और कंपनियों की जिम्मेदारी
सरकार ने यह भी तय किया है कि 16 साल या उससे अधिक उम्र के सभी गिग वर्कर्स को एक सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। आधार जैसे दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण के बाद उन्हें डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा। इसके साथ ही एक अलग सामाजिक सुरक्षा कोष बनाया जाएगा, जिसमें कंपनियों को योगदान देना होगा। अगर कोई कंपनी समय पर पैसा जमा नहीं करती है, तो उस पर हर महीने एक प्रतिशत ब्याज लगेगा। सभी कंपनियों को अपने गिग वर्कर्स का डेटा नियमित रूप से पोर्टल पर अपडेट करना भी अनिवार्य होगा।