Global Companies Layoffs : साल 2026 में दुनिया की कई बड़ी कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। आईटी, बैंकिंग, रिटेल, हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे लगभग हर बड़े सेक्टर में छंटनी देखने को मिल रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 40 से अधिक वैश्विक कंपनियां इस साल ले-ऑफ की घोषणा कर चुकी हैं। इनमें Amazon, Meta, Oracle, UPS, Citi, Dell, Visa, Nike, Walmart और Standard Chartered जैसी दिग्गज कंपनियां भी शामिल हैं।
क्या AI सबसे बड़ा कारण बन गया है?
रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब कई कंपनियों की कार्यप्रणाली का अहम हिस्सा बन चुका है। Block, Coinbase और Standard Chartered जैसी कंपनियों ने स्वीकार किया है कि AI कई ऐसे काम करने लगा है, जिन्हें पहले कर्मचारी संभालते थे। हालांकि सभी कंपनियां सिर्फ AI को वजह नहीं बता रहीं। कई कंपनियों ने बिजनेस री-स्ट्रक्चरिंग, लागत कम करने और बाजार में कमजोर मांग को भी छंटनी की बड़ी वजह बताया है।
किन कंपनियों ने सबसे ज्यादा नौकरियां खत्म कीं?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल सबसे बड़ी छंटनी UPS ने घोषित की है, जहां करीब 30,000 कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होंगी। इसके बाद Oracle ने लगभग 21,000, Citi ने 20,000, Amazon ने करीब 16,000 और Dell ने लगभग 11,000 कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया है। वहीं Estée Lauder, British American Tobacco, Visa, Nike, Atlassian, Cloudflare समेत कई अन्य कंपनियों ने भी हजारों पद खत्म किए हैं।
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किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर?
सबसे अधिक असर टेक्नोलॉजी कंपनियों पर दिखाई दे रहा है, लेकिन बैंकिंग, रिटेल, हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी इससे अछूते नहीं हैं। कंपनियां डिजिटल बदलाव, ऑटोमेशन और लागत घटाने की रणनीति के तहत अपने वर्कफोर्स में कटौती कर रही हैं। कई संस्थान भविष्य की जरूरतों के हिसाब से नए कौशल वाले कर्मचारियों पर अधिक निवेश की तैयारी भी कर रहे हैं।
आने वाले समय में और बढ़ सकती है छंटनी?
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। अमेरिका में 100 से अधिक कंपनियां बड़े पैमाने पर छंटनी से जुड़े WARN नोटिस दाखिल कर चुकी हैं। वहीं वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सर्वे के अनुसार, दुनिया की 41% कंपनियों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में AI के कारण उनके कुल कर्मचारियों की संख्या में कमी आ सकती है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों में तकनीकी बदलाव के साथ रोजगार का स्वरूप भी तेजी से बदलने वाला है।