ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। कई देशों के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका, चीन, जापान और भारत में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया है। संयुक्त अरब अमीरात ने तो अस्थिरता के चलते अपने बाजार कुछ दिनों के लिए बंद भी कर दिए हैं।
तेल बाजार में तेज हलचल
मध्य पूर्व में हालात बिगड़ने से तेल और गैस की कीमतों में तेजी आ गई है। ईरान पर हमले और क्षेत्र में बढ़ते खतरे के कारण आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत में करीब 15 प्रतिशत तक उछाल देखा गया है। इससे ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है।
रूस के बाजार में अलग तस्वीर
जहां बाकी देशों के बाजार दबाव में हैं, वहीं रूस के शेयर बाजार में तेजी देखी जा रही है। खासकर तेल और गैस कंपनियों के शेयरों में उछाल आया है। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो रूसी तेल की मांग बढ़ सकती है। यही कारण है कि वहां ऊर्जा कंपनियों के शेयर चढ़ रहे हैं।
ये भी पढ़ें : Middle East में बढ़ते तनाव पर PM Modi की दो टूक, बोले शांति ही रास्ता, भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता
तेल कंपनियों को मिल सकता है फायदा
रूस दुनिया के बड़े तेल निर्यातकों में शामिल है। अगर मध्य पूर्व से सप्लाई घटती है तो रूस एक विकल्प के तौर पर उभर सकता है। बाजार में इसी संभावना को देखते हुए निवेशक रूसी ऊर्जा कंपनियों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इससे वहां के प्रमुख सूचकांक में भी बढ़त दर्ज की गई है।
सबसे बड़ी चिंता समुद्री रास्ता
विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है। अगर यहां टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होती है तो तेल की कमी और कीमतों में तेज उछाल संभव है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विश्लेषकों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। महंगा तेल दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। फिलहाल बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं और आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर सबकी नजर टिकी है।