Goa Voter List Issue : गोवा में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने चुनाव आयोग के ऑनलाइन सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 97 ऐसे लोगों के नाम अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए, जिन्हें जांच के बाद योग्य मतदाता माना गया था। स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने उन्हें दोबारा सूची में जोड़ने का फैसला भी कर लिया था, लेकिन तकनीकी दिक्कत के कारण ऐसा नहीं हो सका।
पहले हटे नाम, फिर जांच में मिले सही
इन 97 लोगों के नाम पहले कुछ तकनीकी गड़बड़ियों के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया में डाल दिए गए थे। इसके बाद संबंधित लोगों ने जरूरी दस्तावेज जमा किए और आपत्तियां दर्ज कराईं। जांच के बाद चुनाव अधिकारियों ने माना कि इन मतदाताओं के नाम हटाना सही नहीं था और उन्हें अंतिम सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
सिस्टम में फंसा मामला
समस्या तब शुरू हुई जब पहले लिया गया फैसला चुनाव आयोग के ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज हो चुका था। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों के पास उस फैसले को वापस लेने या सुधार करने का विकल्प ही नहीं था। गोवा इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने भी बताया कि सिस्टम में पुराने फैसले को हटाने और दस्तावेज दोबारा अपलोड करने की सुविधा मौजूद नहीं थी।
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लगातार भेजे गए ईमेल
रिपोर्ट के मुताबिक गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने 13 से 18 फरवरी के बीच चुनाव आयोग को कई ईमेल भेजे। इन ईमेल में बार-बार कहा गया कि 97 मामलों में सुधार की जरूरत है और सिस्टम में बदलाव की सुविधा दी जाए। अधिकारियों ने यह भी लिखा कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो योग्य मतदाता अंतिम सूची से बाहर रह जाएंगे। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।
अंतिम सूची में नहीं आए नाम
बताया गया है कि 21 फरवरी को जब अंतिम वोटर लिस्ट जारी हुई, तब भी इन 97 लोगों के नाम उसमें शामिल नहीं थे। इनमें सबसे ज्यादा 65 मतदाता तालेगांव विधानसभा क्षेत्र के थे। बाकी मतदाता सेंट क्रूज, कुम्बारजुआ, प्रियोल, मडगांव, बेनाउलिम और वेलिम क्षेत्रों से जुड़े थे। यह मामला स्थानीय चुनाव अधिकारियों की शक्तियों और केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े करता है।
सिर्फ वोट नहीं, योजनाओं पर भी असर
वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने का असर केवल मतदान तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, गोवा की कुछ सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए मतदाता होना जरूरी माना जाता है। इनमें डायलिसिस, एंजियोप्लास्टी, ओपन हार्ट सर्जरी, ट्रांसप्लांट और कीमोथेरेपी जैसे इलाज शामिल हैं। अंतिम सूची में नाम नहीं आने के बाद कुछ लोगों को नए मतदाता के रूप में फिर से आवेदन करने की सलाह दी गई। ऐसे में यह मामला सिर्फ वोटर लिस्ट की गलती नहीं, बल्कि लोगों के अधिकारों और सुविधाओं से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।