सरकार ने सोने और चांदी की इंपोर्ट कीमतों में कटौती कर दी है, जिससे इन कीमती धातुओं पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी कम हो गई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब इंपोर्ट पर टैक्स का बोझ पहले के मुकाबले हल्का होगा। यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। सरकार के इस कदम के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में देश में सोने और चांदी के भाव कुछ नरम हो सकते हैं।
सोने और चांदी की नई इंपोर्ट कीमतें
सरकार ने सोने की बेस इंपोर्ट कीमत करीब 50 डॉलर घटाकर 1,518 डॉलर प्रति 10 ग्राम तय कर दी है। वहीं चांदी की बेस इंपोर्ट कीमत में 800 डॉलर से ज्यादा की कटौती की गई है और इसे 2,657 डॉलर प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। ये नई कीमतें तय टैरिफ कैटेगरी के तहत किसी भी रूप में इंपोर्ट होने वाले सोने और चांदी पर लागू होंगी। इसका सीधा मतलब है कि इंपोर्ट करते समय लगने वाला टैक्स कम होगा, जिससे घरेलू बाजार में दाम घटने की गुंजाइश बनेगी।
किन चीजों पर लागू होगी यह राहत
ड्यूटी में की गई यह कटौती हाई प्योरिटी सोने की छड़ों, सिक्कों और चांदी के बुलियन व मेडल पर लागू होगी। हालांकि, गहनों, कीमती धातुओं से बनी दूसरी चीजों और पोस्ट या कूरियर के जरिए लाए गए इंपोर्ट पर यह राहत नहीं मिलेगी। यानी आम ग्राहक को इसका फायदा सीधे गहनों में तुरंत दिखे, यह जरूरी नहीं है, लेकिन कच्चे सोने और चांदी के सस्ते होने से आगे चलकर ज्वेलरी के दाम भी नीचे आ सकते हैं।
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दाम घटने का पूरा फायदा कैसे मिलेगा
अगर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आती है, तो भारत में इसका असर पहले से ज्यादा दिखेगा। पहले ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी होने की वजह से ग्लोबल गिरावट का पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाता था। लेकिन अब ड्यूटी घटने के बाद कीमतों में होने वाली कमी ज्यादा असरदार होगी। यानी बाजार में सोना और चांदी पहले के मुकाबले सस्ते हो सकते हैं।
आर्थिक दबाव और सरकार की चिंता
सोने और चांदी के दाम रिकॉर्ड स्तर के करीब होने से इंपोर्ट बिल तेजी से बढ़ रहा है। इससे व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, क्योंकि रुपया पहले से ही डॉलर के मुकाबले कमजोर है। कई एक्सपर्ट्स का मानना था कि सरकार ड्यूटी बढ़ा सकती है, लेकिन इसके उलट सरकार ने कटौती का फैसला लिया है। इससे साफ है कि सरकार बाजार और उद्योग को राहत देना चाहती है।
भारत की सोना चांदी पर निर्भरता
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और चांदी का सबसे बड़ा बाजार है। देश अपनी लगभग पूरी सोने की जरूरत इंपोर्ट से पूरी करता है, जबकि चांदी की 80 प्रतिशत से ज्यादा मांग विदेशों से पूरी होती है। पिछले साल भारत ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा सोने और चांदी के इंपोर्ट पर खर्च किया था। ऐसे में ड्यूटी में कटौती का असर आने वाले समय में बाजार, व्यापार और आम लोगों की खरीदारी पर साफ दिख सकता है।