Supply Of Cooking Gas: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने देश में रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आपात अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए तेल रिफाइनरियों को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में किसी तरह की रुकावट आने पर भी घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस की कमी का सामना न करना पड़े।
आयात पर निर्भरता
भारत दुनिया के बड़े एलपीजी उपभोक्ताओं में शामिल है और घरेलू जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। पिछले वर्ष देश में लगभग 33 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक रसोई गैस की खपत दर्ज की गई थी। कुल मांग का करीब दो-तिहाई हिस्सा विदेशों से आता है, जिसमें अधिकांश आपूर्ति मिडिल ईस्ट के देशों से होती है।
उत्पादन पर जोर
सरकार ने सभी तेल रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे अपने पास उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन का अधिकतम उपयोग एलपीजी बनाने में करें। साथ ही गैस उत्पादकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दोनों गैसों की आपूर्ति सरकारी रिफाइनरियों को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराएं ताकि घरेलू वितरण प्रभावित न हो।
उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी गैस
सरकार के मुताबिक तैयार एलपीजी की सप्लाई मुख्य रूप से सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी, जिनमें इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम शामिल हैं। यही कंपनियां देशभर में घरेलू उपभोक्ताओं तक रसोई गैस सिलेंडर पहुंचाती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 33 करोड़ से अधिक सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता हैं।
प्राथमिकता एलपीजी को
प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग एलपीजी उत्पादन में बढ़ाने से पेट्रोकेमिकल उद्योग पर कुछ असर पड़ सकता है। सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि इन गैसों का उपयोग पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने में कम से कम किया जाए। माना जा रहा है कि इससे कुछ कंपनियों के उत्पादन और मुनाफे पर असर पड़ सकता है, लेकिन घरेलू गैस सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है।