हरियाणा में 590 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाया है। चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की शाखा से जुड़ा यह मामला उजागर होते ही राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज की सूची से बाहर कर दिया गया है।
सरकारी काम से हटाए गए बैंक
सरकार के इस फैसले के बाद बैंकिंग क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है। अब इन दोनों बैंकों को सरकारी लेनदेन या खातों के प्रबंधन में शामिल नहीं किया जाएगा। बताया जा रहा है कि नियमों के पालन और समय पर ऑडिट रिपोर्ट न देने जैसे मुद्दों पर सरकार की नजर और कड़ी हो गई है।
सरकारी बैंकों को मिल सकता है लाभ
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का सीधा फायदा बड़े सरकारी बैंकों को हो सकता है। अगर सरकारी खातों का पैसा निजी बैंकों से निकाला जाता है, तो वह एसबीआई और पीएनबी जैसे बैंकों में जा सकता है। इससे सरकारी बैंकों की जमा राशि बढ़ सकती है, जबकि निजी बैंकों पर दबाव बढ़ेगा।
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जमा और कमीशन आय पर असर
निजी बैंकों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की कुल जमा राशि में सरकार की हिस्सेदारी 8 से 10 प्रतिशत तक बताई जा रही है। अगर यह पैसा निकलता है तो बैंक की सस्ती जमा यानी कासा पर असर पड़ेगा। साथ ही सरकारी काम से मिलने वाली एजेंसी कमीशन आय भी घट सकती है।
आईडीएफसी की सफाई
मामले पर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के प्रबंधन ने कहा है कि यह कोई प्रणालीगत समस्या नहीं है। बैंक ने भरोसा दिलाया है कि वह अपनी प्रक्रियाओं को और मजबूत करेगा। उनका कहना है कि सरकार के साथ उनके संबंध मजबूत हैं और सुधार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
एयू बैंक का पक्ष
एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। बैंक का कहना है कि उसके यहां कोई धोखाधड़ी नहीं हुई। उनके अनुसार, जो भी लेनदेन हुए, वे संबंधित विभाग की अनुमति से सामान्य प्रक्रिया के तहत किए गए। फिलहाल सरकार की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।