प्याज की गिरती कीमतों से परेशान किसानों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र के सतारा में घोषणा की कि सरकार अब किसानों से 12.35 रुपये प्रति किलोग्राम यानी 1235 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्याज खरीदेगी। सरकार ने साफ कहा है कि किसानों का पूरा स्टॉक खरीदा जाएगा ताकि उन्हें नुकसान से बचाया जा सके। इस फैसले के बाद किसानों के बीच राहत की उम्मीद जगी है।
गिरती कीमतों से संकट
पिछले कुछ समय से प्याज की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण निर्यात पर असर पड़ा है। इससे घरेलू बाजार में प्याज की मांग और सप्लाई का संतुलन बिगड़ गया। इसके चलते किसानों को अपनी फसल कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। कई किसान लगातार नुकसान की शिकायत कर रहे थे और सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे थे।
नाफेड को मिला जिम्मा
सरकार ने इस खरीद प्रक्रिया की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ यानी नाफेड को दी है। कृषि मंत्री ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब नाफेड किसानों से सीधे प्याज खरीदेगा। सरकार का मानना है कि इससे बाजार में स्थिरता आएगी और किसानों को तत्काल राहत मिल सकेगी। यह कदम उन किसानों के लिए भी अहम माना जा रहा है जो लंबे समय से कीमतों की मार झेल रहे थे।
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किसानों ने उठाए सवाल
हालांकि सरकार के इस फैसले पर सभी खुश नजर नहीं आए। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने खरीद दर पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि 1235 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत उत्पादन लागत से भी कम है। उनका दावा है कि किसानों को उचित लाभ देने के लिए कम से कम 3000 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य तय होना चाहिए। इसी वजह से कई किसान संगठन फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे।
विरोध की चेतावनी
प्याज उत्पादक संघ ने कहा कि जिन किसानों ने पहले ही कम दामों पर प्याज बेच दिया, उन्हें भी मुआवजा मिलना चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। किसानों का कहना है कि केवल खरीद का ऐलान काफी नहीं है बल्कि सही कीमत मिलना भी जरूरी है।
अब सबकी नजर आगे
सरकार के इस फैसले के बाद अब किसानों और बाजार की नजर अगले कदमों पर टिकी है। देखना होगा कि यह खरीद योजना किसानों की कितनी मदद कर पाती है। फिलहाल राहत और नाराजगी दोनों साथ दिखाई दे रही हैं। आने वाले दिनों में यह फैसला किसानों के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, इस पर सबकी नजर बनी रहेगी।