Government Reveals Details on Delhi pollution: केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारण मौसम के अनुसार बदलते रहते हैं। सरकार के अनुसार, गर्मियों में धूल, निर्माण और तोड़-फोड़ की गतिविधियां प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह बनती हैं, जबकि सर्दियों में वाहनों से निकलने वाला धुआं, बायोमास जलाना और अन्य उत्सर्जन प्रदूषण का प्रमुख कारण होते हैं। यह जानकारी राज्यसभा में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से लिखित जवाब में दी गई।
गर्मी में निर्माण कार्य और धूल का सबसे अधिक असर
सरकार के अनुसार, गर्मी के मौसम में निर्माण कार्य, इमारतों की तोड़-फोड़ और उड़ने वाली धूल का वायु प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान होता है। इन गतिविधियों की हिस्सेदारी कुल प्रदूषण में 25 से 31 प्रतिशत तक आंकी गई है। इसके बाद परिवहन क्षेत्र का योगदान 18 से 21 प्रतिशत बताया गया है। इसके अलावा उद्योगों, बायोमास जलाने और अन्य स्रोतों से निकलने वाला प्रदूषण भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
सर्दियों में धुआं और वाहनों का बढ़ता प्रभाव
सरकार ने बताया कि सर्दियों के दौरान प्रदूषण का स्वरूप बदल जाता है। इस मौसम में वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और बायोमास जलाने जैसी गतिविधियां प्रमुख कारण बनती हैं। इसके अलावा घरेलू कचरा, ठोस अपशिष्ट और फसल अवशेष जलाने से भी प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। सर्दियों में निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल का योगदान गर्मियों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रहता है।
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अध्ययन में सामने आए प्रदूषण के प्रमुख स्रोत
सरकार ने बताया कि वर्ष 2018 में दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 और पीएम 10 के प्रमुख स्रोतों की पहचान के लिए विस्तृत अध्ययन कराया गया था। इस अध्ययन के आधार पर अलग-अलग मौसम में प्रदूषण के मुख्य कारणों का आकलन किया गया। सरकार का कहना है कि इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण की रणनीतियां तैयार की जा रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जारी है निगरानी
दिल्ली की खराब होती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) भी समय-समय पर प्रदूषण के कारणों का विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार करता है। सरकार का कहना है कि अलग-अलग मौसम में प्रदूषण के स्रोत बदलते हैं, इसलिए उनके अनुरूप नियंत्रण उपाय अपनाए जा रहे हैं, ताकि राजधानी की हवा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।