अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। ग्रीनलैंड फिलहाल डेनमार्क के नियंत्रण में है, लेकिन ट्रंप इसे रणनीतिक और आर्थिक रूप से अहम मानते हुए अपने प्रभाव में लेना चाहते हैं। इस मुद्दे पर यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। हालात इतने बिगड़े कि यूरोपियन यूनियन ने अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील पर काम रोक दिया है।
यूरोप का निवेश अमेरिका के लिए क्यों अहम
यूरोप का अमेरिका में निवेश बेहद बड़ा है। यूरोपियन यूनियन के निवेशकों की अमेरिकी एसेट्स में हिस्सेदारी करीब 10 ट्रिलियन डॉलर है। यह अमेरिका की कुल जीडीपी के लगभग एक तिहाई के बराबर मानी जाती है। यूरोपीय निवेशकों का इतना बड़ा दांव पहले कभी अमेरिका में नहीं रहा। यही वजह है कि इस विवाद ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
कहां-कहां लगा है यूरोप का पैसा
यूरोपीय निवेशकों के पास अमेरिकी शेयर बाजार में करीब 6 ट्रिलियन डॉलर की हिस्सेदारी है, जो उनकी कुल अमेरिकी होल्डिंग का लगभग 58 प्रतिशत है। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में यूरोप का करीब 2 ट्रिलियन डॉलर लगा है। कॉरपोरेट बॉन्ड और अन्य बॉन्ड में भी यूरोप का निवेश करीब 2 ट्रिलियन डॉलर बताया जा रहा है। अगर यूरोप ने यह पैसा निकालना शुरू किया, तो अमेरिकी बाजारों में बड़ा झटका लग सकता है।
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डेनमार्क ने घटाई अमेरिकी ट्रेजरी हिस्सेदारी
ग्रीनलैंड विवाद के बीच डेनमार्क ने अमेरिका में अपनी ट्रेजरी होल्डिंग कम कर दी है। फिलहाल डेनमार्क की हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 9 अरब डॉलर रह गई है, जो 14 साल का सबसे निचला स्तर है। बीते एक साल में ही डेनमार्क ने अमेरिकी ट्रेजरी में करीब 30 प्रतिशत की कटौती की है। यह कदम अमेरिका के लिए एक चेतावनी की तरह देखा जा रहा है।
अमेरिका के बढ़ते कर्ज ने बढ़ाई मुश्किल
अमेरिका पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। फेडरल सरकार का करीब 26 प्रतिशत कर्ज अगले 12 महीनों में पूरा होने वाला है। इसका मतलब है कि अमेरिका को करीब 10 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज नए सिरे से और ज्यादा ब्याज दरों पर लेना पड़ सकता है। ऐसे समय में अगर यूरोपीय निवेशक पीछे हटते हैं, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
चीन को मिल सकता है सीधा फायदा
अगर अमेरिका और यूरोप के रिश्ते और खराब होते हैं, तो इसका फायदा चीन उठा सकता है। चीन पहले ही वैश्विक निवेश और व्यापार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। यूरोप का भरोसा अगर अमेरिका से उठता है, तो निवेश का रुख चीन या अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर जा सकता है। ऐसे में ग्रीनलैंड विवाद सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक ताकत का बड़ा खेल बनता दिख रहा है।