कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। हरजिंदर ने कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर अपना नया व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी दर्ज किया। उन्होंने स्नैच में 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाया। इससे पहले वह 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में 71 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीत चुकी हैं।
साधारण परिवार से शुरू हुआ सफर
पंजाब के नाभा स्थित मेहस गांव की रहने वाली हरजिंदर कौर का सफर संघर्षों से भरा रहा है। उनका परिवार एक छोटे से घर में रहता था और खेती के साथ पशुपालन करता था। बचपन से ही हरजिंदर घर और खेत के कामों में हाथ बंटाती थीं। मवेशियों के लिए चारा काटना और भूसा काटने की मशीन चलाना उनकी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों में शामिल था।
भूसा काटते-काटते बनी मजबूत बाजुएं
हरजिंदर की सफलता की सबसे खास कहानी उनकी मेहनत से जुड़ी है। बचपन में भूसा काटने की मशीन चलाने और खेतों में लगातार काम करने से उनकी बाजुओं में असाधारण ताकत आई। यही ताकत आगे चलकर वेटलिफ्टिंग में उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी। परिवार की आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने कभी मेहनत से पीछे हटना नहीं सीखा।
कबड्डी से शुरू हुआ खेलों का सफर
हरजिंदर को शुरुआत से खेलों का शौक था। सरकारी स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने कबड्डी खेलना शुरू किया। अभ्यास के लिए वह रोजाना करीब पांच किलोमीटर साइकिल चलाकर मैदान पहुंचती थीं। बाद में आनंदपुर साहिब के कॉलेज में कोच सुरिंदर सिंह ने उन्हें कबड्डी टीम में मौका दिया। इसके बाद पंजाबी यूनिवर्सिटी पहुंचने पर कोच परमजीत शर्मा की नजर उनकी शारीरिक ताकत पर पड़ी।
रस्साकशी से पहुंचीं वेटलिफ्टिंग तक
कोचों ने उनकी मजबूत बाजुओं को देखते हुए पहले उन्हें रस्साकशी टीम में शामिल किया। वहां शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी गई। शुरुआत में खेल बदलना आसान नहीं था, लेकिन हरजिंदर ने लगातार मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में एक और पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
इसे भी पढे़ं : 12 हजार से कम आबादी, लेकिन 33 कॉमनवेल्थ मेडल, 17 साल की फेमिली क्रिस्टी नोटे ने फिर बढ़ाया नॉरू का मान
संघर्ष से सफलता तक बनी मिसाल
हरजिंदर कौर की कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता रोक नहीं सकतीं। खेतों में काम करने वाली एक साधारण किसान परिवार की बेटी आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए सिल्वर मेडल जीत चुकी है। उनका यह सफर मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का उदाहरण है, जो देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गया है।