भारत में महंगाई बढ़ने का नया खतरा सामने आया है और इसकी वजह युद्ध नहीं बल्कि मौसम बनता दिख रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक भीषण गर्मी और हीटवेव देश की आर्थिक स्थिति पर दबाव डाल सकती है। अप्रैल महीने में ही कई राज्यों में तापमान 47 डिग्री के पार पहुंच गया, जिससे बिजली की मांग तेजी से बढ़ी और ऊर्जा लागत पर असर पड़ा। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हो गई है।
कमजोर मानसून से बढ़ेगी चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो हालात और बिगड़ सकते हैं। खेती पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जिससे खाद्य उत्पादन घट सकता है। कृषि पर निर्भर बड़ी आबादी की आय प्रभावित होगी और इसका असर बाजार की मांग पर भी दिखेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि खराब मौसम खाद्य कीमतों को ऊपर ले जा सकता है।
खाद्य महंगाई का बढ़ेगा दबाव
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी करीब 37 फीसदी है, इसलिए इसमें बदलाव का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। अगर सब्जियों और अनाज की कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई दर तेजी से ऊपर जा सकती है। पिछले साल कीमतें कम रहने से राहत मिली थी, लेकिन इस बार स्थिति उलट सकती है।
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ऊर्जा मांग भी बना रही दबाव
गर्मी के कारण एयर कंडीशनर और पंखों का इस्तेमाल बढ़ गया है, जिससे बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इससे ऊर्जा लागत बढ़ रही है और इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। साथ ही अगर किसानों को सिंचाई के लिए ज्यादा डीजल का उपयोग करना पड़ा, तो कृषि लागत भी बढ़ेगी।
महंगाई 5% से ऊपर जाने का अनुमान
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वित्तीय वर्ष में महंगाई दर 5 फीसदी से ऊपर जा सकती है। यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के लक्ष्य से ज्यादा है। अगर मानसून कमजोर रहा तो यह दर और बढ़ सकती है, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ने का खतरा रहेगा।
अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है, क्योंकि देश की 60 फीसदी से ज्यादा आबादी खेती पर निर्भर है। खराब फसल से आय घटेगी और मांग कमजोर पड़ेगी। इससे आर्थिक विकास की रफ्तार भी धीमी हो सकती है। कुल मिलाकर साफ है कि इस बार महंगाई का खतरा किसी युद्ध से नहीं, बल्कि मौसम के बदलते मिजाज से पैदा हो रहा है।