Ram Mandir Offering Issue: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों की जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि फिलहाल इस मामले में अर्जेंट सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, याचिका में उठाए गए मुद्दों पर नियमित प्रक्रिया के तहत विचार किया जा सकता है। इस फैसले के बाद मामले की जांच और न्यायिक हस्तक्षेप को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
स्वतंत्र जांच और ऑडिट की मांग
याचिकाकर्ता मोहित अशोक ने अदालत से मांग की थी कि राम मंदिर में प्राप्त नकद दान, सोना-चांदी और अन्य चढ़ावे के प्रबंधन की स्वतंत्र जांच कराई जाए। याचिका में अदालत की निगरानी में समयबद्ध जांच के साथ-साथ पूरे मामले का स्वतंत्र ऑडिट कराने का अनुरोध भी किया गया था। साथ ही दान कोष के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।
कोर्ट ने क्यों नहीं मानी अर्जेंट सुनवाई की मांग
मामले की सुनवाई के दौरान अवकाशकालीन पीठ ने तत्काल सुनवाई की मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि इस विषय पर राज्य सरकार पहले ही संज्ञान ले चुकी है और जांच की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि उसके समक्ष पहले से बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं, इसलिए इस चरण में विशेष प्राथमिकता देने की आवश्यकता नहीं है।
SIT की जांच पर टिकी निगाहें
राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल कर रहा है। जानकारी के अनुसार जांच टीम ने विभिन्न पक्षों से पूछताछ की है और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जांच एजेंसी लगातार संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज कर रही है तथा उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही है।
रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई संभव
माना जा रहा है कि SIT की रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। ऐसे में अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाले संभावित प्रशासनिक या कानूनी कदमों पर टिकी हुई हैं।