High Courts big decision: उत्तर प्रदेश के जौनपुर के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता धनंजय सिंह को प्रयागराज हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उन्होंने करीब 23 साल पुराने वाराणसी के चर्चित गैंगस्टर एक्ट मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी क्रिमिनल अपील को खारिज करते हुए साफ कहा कि गैंगस्टर एक्ट जैसे मामलों में व्यक्तिगत शिकायतकर्ता या हमले के शिकार व्यक्ति को ‘पीड़ित’ के रूप में अपील करने का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत शुक्ला की सिंगल बेंच ने यह आदेश सुनाया। मामला 2002 में वाराणसी के नदेसर टकसाल सिनेमा हॉल के पास हुए उस ओपन शूटआउट से जुड़ा है, जिसमें एके-47 जैसी ऑटोमेटिक राइफलों से धनंजय सिंह की गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी।
2002 का पहला ‘ओपन शूटआउट’
अक्टूबर 2002 में हुए इस हमले ने वाराणसी में सनसनी फैला दी थी। हमले में धनंजय सिंह बाल-बाल बचे थे। उन्होंने तत्कालीन विधायक अभय सिंह, एमएलसी विनीत सिंह समेत कई लोगों पर एफआईआर दर्ज करवाई थी। बाद में इस मामले में गैंगस्टर एक्ट की धाराएँ भी जोड़ी गई थीं। ट्रायल कोर्ट ने 29 अगस्त 2025 को सदीप सिंह, संजय सिंह, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह उर्फ बबलू को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ धनंजय सिंह हाईकोर्ट पहुंचे थे।
कोर्ट ने राज्य की भूमिका पर दिया जोर
हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि गैंगस्टर एक्ट के मामले समाज और राज्य के खिलाफ माने जाते हैं, किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं। इसलिए इस तरह के मामलों में ‘व्यक्तिगत पीड़ित’ की अपील स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण रखना और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करना राज्य की जिम्मेदारी है। कोई भी व्यक्ति इस दायित्व को अपने हाथ में नहीं ले सकता। इसी आधार पर अदालत ने धनंजय सिंह की अपील को खारिज कर दिया।