
हिमाचल प्रदेश में बारिश ने एक बार फिर तबाही मचाई है। राजधानी शिमला, मंडी और अन्य जिलों में बीती रात भारी बारिश से हालात बिगड़ गए। शिमला में 141 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे जगह-जगह भूस्खलन हुआ। प्रदेश में तीन नेशनल हाईवे समेत 653 सड़कें बंद हो गईं। 1205 बिजली ट्रांसफार्मर और 160 पेयजल योजनाएं भी ठप हैं। मंडी में 313, कुल्लू में 153 और शिमला में 58 सड़कें मलबे से बाधित पड़ी हैं।
मंडी में भूस्खलन से तीन की मौत, दो सुरक्षित
मंडी जिले के सुंदरनगर उपमंडल के ब्रगटा गांव में भूस्खलन की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे में दो महिलाओं और आठ महीने के बच्चे ने जान गंवा दी। वहीं इस हादसे में दो लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। प्रशासन और पुलिस की टीमें घटनास्थल पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
धर्मपुर में तबाही, बसें और वाहन बहे
वहीं मंडी जिले के धर्मपुर क्षेत्र में सोन खड्ड ने विकराल रूप धारण कर लिया। रातभर हुई तेज बारिश के बाद बस स्टैंड पूरी तरह जलमग्न हो गया। कई एचआरटीसी बसें और निजी वाहन पानी के तेज बहाव में बह गए। एक होस्टल में मौजूद 150 बच्चों ने ऊपरी मंजिल पर जाकर अपनी जान बचाई। फिलहाल एक व्यक्ति लापता है और रेस्क्यू टीमें उसकी तलाश कर रही हैं।
शिमला में भूस्खलन से ठप हुई आवाजाही
राजधानी शिमला में भी जगह-जगह भूस्खलन हुआ। हिमलैंड और बीसीएस इलाकों में सड़कें बंद हो गईं। कई गाड़ियां मलबे में दब गईं। सुबह के समय शहर के सर्कुलर रोड पर यातायात पूरी तरह ठप रहा और लोग पैदल अपने गंतव्य तक पहुंचे। मौसम विभाग ने 22 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।
मानसून में अब तक 409 मौतें
इस मानसून सीजन में राज्य में अब तक 409 लोगों की मौत हो चुकी है। 473 लोग घायल हुए और 41 अभी भी लापता हैं। भारी बारिश और हादसों से 579 पक्के और 899 कच्चे मकान पूरी तरह ढह गए हैं। 2,109 मवेशियों की भी मौत हुई है। कुल मिलाकर 4,50,444.91 लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान दर्ज किया गया है।
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नाले में बहे दो चचेरे भाई, एक की मौत
इसके साथ ही पंडोह पुलिस चौकी के तहत सुमा नाले के तेज बहाव में दो चचेरे भाई बह गए। इनमें से एक का शव बरामद कर लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। हादसा उस समय हुआ जब ग्रामीण अस्थायी पुलिया पार कर रहे थे।
थुरल में जमीन धंसी, गांव खाली कराया गया
इसके अलावा कांगड़ा जिले के थुरल तहसील के गरडेड़ गांव में मंगलवार सुबह भारी भूस्खलन हुआ। करीब 10 फीट तक जमीन धंस गई। यहां के 10 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कई घर और गाड़ियां मलबे में दब गईं। प्रशासन ने गांव के आसपास लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है।
लोगों ने दहशत में गुजारी रात
शिमला के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। पेड़ बिजली की लाइनों पर गिर गए और कई इलाकों में अंधेरा छा गया। लोग पूरी रात डर में रहे। प्रशासन का कहना है कि टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं और हालात को जल्द सामान्य बनाने की कोशिश की जा रही है।